भारत-पाक अंतरराष्ट्रीय हुसैनीवाला बॉर्डर के पास शहीदी दिवस 23 मार्च को हुसैनीवाला रेलवे स्टेशन का निर्माण किया गया था, जिसकी हालत अब खस्ता होती जा रही है। रेलवे का बोर्ड गिरा पड़ा है, स्टेशन पर घास फूस उग चुका है। ट्रैक भी कई जगह से धंसा हुआ नजर आ रहा है। दोनों देशों के बीच होने वाली रिट्रीट सेरेमनी के बाद पर्यटक स्टेशन देखने आते हैं, लेकिन गंदगी के कारण वहां बैठ नहीं पाते हैं।
हुसैनीवाला स्टेशन से गुजर रही अंतरराष्ट्रीय रेल पटरी के ऊपर से ग्रामीण मिट्टी से भरी ट्रैक्टर-ट्रालियां लेकर गुजर रहे हैं, जिससे ट्रैक जमीन में धंस रहा है। उक्त रेल पटरी फिरोजपुर छावनी रेलवे स्टेशन से पाकिस्तान के लाहौर तक बिछी थी। जिसे 1971 की जंग के बाद पाक फौज उखाड़कर ले गई थी। उसके बाद से इस तरफ से दोनों देशों के बीच ट्रेन का आवागमन बंद हो गया था।
सही मायने में सतलुज दरिया से लगभग एक किलोमीटर पीछे सिंचाई विभाग की वर्कशाप के पास हुसैनीवाला रेलवे स्टेशन स्थापित था। जो दोनों देशों की जंग में ध्वस्त हो गया। उसके बाद अब 23 मार्च को सतलुज दरिया के पुल के पास लोगों के लिए रेलवे स्टेशन का निर्माण किया गया।
रेल प्रशासन की तरफ से उक्त रेल पटरी पर साल में दो बार ट्रेन दौड़ाई जाती है, शहीदी दिवस 23 मार्च और 13 अप्रैल के मेले में। स्टेशन की देख रेख नहीं होने के कारण हालत खस्ता हो चुकी है। रेलवे स्टेशन का साइन बोर्ड गिरा पड़ा है। ट्रैक नया बिछाया था, लेकिन मिट्टी से भरी ट्रैक्टर ट्राली गुजरने के कारण वह भी धंस रहा है।
लोगों की मांग रिट्रीट सेरेमनी देखने को रोजाना चलाई जाए स्पेशल ट्रेन
भारत-पाक हुसैनीवाला चेक पोस्ट पर दोनों देशों के जवानों के बीच रिट्रीट सेरेमनी देखने आए रमेश कुमार, वीना रानी, रजिंदर कुमार व सुखचैन सिंह ने कहा कि रेल प्रशासन को चाहिए कि फिरोजपुर छावनी रेलवे स्टेशन से रोजाना शाम को रिट्रीट सेरेमनी के समय स्पेशल ट्रेन चलाएं।
जिससे लोग सस्ते किराए पर रिट्रीट सेरेमनी देखने के अलावा शहीद-ए-आजम भगत सिंह, राजगुरु और सुखदेव की समाधि पर माथा टेक सके। इससे हुसैनीवाला रेलवे स्टेशन और ट्रैक की भी देखरेख होती रहेगी और पर्यटकों को इससे रेलवे का इतिहास याद रहेगा।