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पति ने दिया साथ तो आसान हो गई कोरोना से जंग की राह, जीएमसीएच 32 की नर्सिंग ऑफिसर हरजिंदर कौर बच्चों से दूर रहकर कर रही कोरोना के मरीजों के बीच ड्यूटी

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चंडीगढ़। जीएमसीएच- 32 की नर्सिंग ऑफिसर हरजिंदर कौर परिवार और बच्चों से दूर रहकर कोरोना के मरीजों की देखभाल में जुटी हैं। हरजिंदर अस्पताल के कोरोना आईसीयू में लगातार दूसरी बार ड्यूटी कर रही हैं। उनका कहना है कि अगर पति का प्यार और साथ मिले तो पत्नी बड़ी से बड़ी मुसीबत का डटकर सामना कर सकती है। उन्होंने पति जसविंदर सिंह के प्यार और सहयोग के बल पर कोरोना से इस जंग में इसे साबित कर दिखाया ह्रै। हरजिंदर के पति एक निजी कंपनी में कार्यरत हैं। कोरोना के कारण जब से उनकी पत्नी की कोविड आईसीयू में ड्यूटी लगी है तब से वह ऑफिस नहीं जा रहे हैं। वर्क फ्रॉम होम के दौरान वे अपने दोनों बच्चों की देखभाल करते हुए अपनी नौकरी भी कर रहे हैं।
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हरजिंदर बोलीं- कोरोना के शुरुआती दौर में अब नहीं कर पाऊंगी नौकरी
हरजिंदर ने बताया कि कोरोना के शुरुआती दौर में जब सबकुछ बंद चल रहा था, तब मेरी कोविड यूनिट में ड्यूटी लगाई गई। उस समय मुझे अपने बच्चों को देखकर ऐसा लगा जैसे अब नौकरी नहीं कर पाऊंगी। लेकिन उस समय मेरे पति ने मेरे डर को दूर करते हुए मुझे हिम्मत दी और निडर होकर ड्यूटी पर जाने की बात कही। बच्चों की देखभाल पर उनका कहना था कि अगर एक मां नौकरी करते हुए अपने बच्चों की देखभाल कर सकती है तो एक पिता भी कर सकता है। उनकी वह बातें सुनकर मैंने तय किया कि मैं कोरोना महामारी के इस दौर में डटकर मुकाबला करूंगी।
अब क्रच की नहीं जरूरत
हरजिंदर ने बताया कि उन्हें 6 साल की बेटी जैसमन और 5 साल का बेटा अभिजोत सिंह है। दोनों काफी छोटे हैं। ऐसी स्थिति में सामान्य दिनों में उन्हें क्रच में छोड़कर ड्यूटी पर जाया करते थे। लेकिन कोरोना ने इस स्थिति से भी मुकाबला करना सिखा दिया है। हरजिंदर का कहना है कि कोरोना महामारी के दौर में वे और उनकी तरह लाखों नर्सिंग स्टाफ अपनी जान जोखिम में डालकर घर परिवार से दूर रहते हुए ड्यूटी कर रही हैं। ऐसे में जरूरी है कि लोग इस महामारी से बचाव में अपना पूरा सहयोग दें।
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