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चंडीगढ़ निगम में स्टाफ की कमी, कर्मियों पर मानसिक बोझ

Mon, 15 Feb 2016 10:10 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
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चंडीगढ़ नगर निगम इस समय स्टाफ की कमी से जूझ रहा है। इसके कारण मौजूद कर्मचारियों पर काम और मानसिक बोझ बढ़ गया है। नगर निगम में इस समय 40 प्रतिशत स्टाफ की कमी है जिससे शहरवासियों के काम और सेवाएं प्रभावित हो रही हैं। इस स्टाफ की कमी से नगर निगम सिटीजन चार्टर को लागू नहीं करा पा रहा है।
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निगम की ओर से 12 फरवरी को 1072 करोड़ रुपये का बजट पास किया गया है। इसमें निगम के स्टाफ की जानकारी दी है। जिसमें बताया है कि सभी कैटेगरी के कुल 5054 स्थायी कर्मियों की जरूरत है। लेकिन इस समय 3030 कर्मचारी हैं। जबकि 2024 पद खाली पड़े हैं। इस साल भी 100 से ज्यादा कर्मचारी रिटायर हो रहे हैं।

पिछले 10 साल से नगर निगम में कोई भी नई भर्ती नहीं हुई है। जिस कारण वर्तमान में तैनात कर्मचारियों पर बोझ बढ़ता जा रहा है। कर्मचारियों की कमी से ही शहर में कई प्रोजेक्ट की प्लानिंग नहीं बन रही है। पहले से चल रहे प्रोजेक्ट भी लेट हैं।
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हाल यह है कि जेई और एसडीओ स्तर के कर्मचारी क्लर्क का काम भी कर रहे हैं। नियमों के अनुसार 5 साल तक जब किसी पद पर नियुक्ति नहीं होती है तो वह समाप्त कर दिया जाता है। नगर निगम ने पिछले 10 साल से नियुक्ति के लिए प्रक्रिया तक शुरू नहीं की है।

सफाई कर्मचारियों के आवेदन मांगे लेकिन भर्ती नहीं
तीन साल पहले नगर निगम ने सफाई कर्मचारियों की भर्ती के लिए नोटिस निकाला। यहां तक कि इसके लिए आवेदन भी मांगे। लेकिन अधिकारियों ने भर्ती की प्रक्रिया अभी तक शुरू नहीं की है। एक सीनियर अफसर के अनुसार निगम के अधिकारी सीबीआई और अन्य तरह की जांच से बचने के लिए भर्ती का निर्णय नहीं ले पाए। क्योंकि उन्हें इस बार का डर था कि उनके यहां से जाने के बाद किसी तरह की बेवजह कार्रवाई न शुरू हो जाए।

कोऑडिनेशन कमेटी की बैठक में उठाया मामला
मेयर अरुण सूद का कहना है कि नगर निगम में स्टाफ की भारी कमी है। उनका कहना है कि इस मामले को उन्होंने कोऑडिनेशन कमेटी की बैठक में भी उठाया है। उनका कहना है कि प्रशासन का नई भर्ती पर पॉजिटिव रिस्पांस मिला है। उन्होंने सलाहकार से यह भी मांग की है कि चंडीगढ़ में भी पंजाब व हरियाणा की तर्ज पर भर्ती की आयु सीमा 35 से 30 साल की जाए। जबकि शहर में सिर्फ 25 साल तक युवा नौकरी के लिए आवेदन कर सकते हैं।

कर्मचारियों पर बोझ बढ़ रहा है
इंटक के उपाध्यक्ष हरजिंद्र सिंह का कहना है कि पदों की भरती नहीं होने से वर्तमान में तैनात कर्मचारियों पर काम का बोझ के साथ साथ मानसिक तनाव भी बढ़ रहा है। उनका कहना है कि इंजीनियरिंग विंग के कर्मचारी छुट्टी के दिन भी काम कर रहे हैं।

समस्याएं दूर करने नहीं आते कई कई दिन
सेक्टर-40 बी की रेजिडेंट्स वेलफेयर एसोसिएशन के अध्यक्ष दलविंदर सैनी का कहना है कि समस्याएं बताने के बावजूद कर्मचारी इन्हें दूर करने के लिए कई कई दिन बाद आते है। हर बार स्टाफ कर्मचारियों के टोटा होने को रोता रहता है।
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