हरियाणा चयन आयोग (एचएसएससी) भर्ती घोटाले की जांच एसआईटी कितनी गंभीरता से कर रही है, इसकी पोल मंगलवार को अदालत में खुल गई। सुभाष नाम के किसी और कर्मचारी को अदालत में पेश किया गया, जबकि जिस मोबाइल नंबर को ट्रेप कर उसे गिरफ्तार करने की बात कही गई, वह दूसरे सुभाष का निकला। बचाव पक्ष ने ध्यान इस पर दिलाये जाने पर एसआईटी की ओर से बताया गया कि विभाग में तीन सुभाष हैं और यह क्लैरिकल मिस्टेक है।
पंचकूला पुलिस ने मंगलवार को इस मामले में गिरफ्तार सभी आठ आरोपियों को अदालत में पेश किया गया। एक आरोपी सुभाष के नाम को लेकर बचाव पक्ष के वकील समीर सेठी ने कहा कि पुलिस ने जिस सुभाष नामक कर्मचारी को मोबाइल फोन टैपिंग के आधार पर गिरफ्तार किया गया। दरअसल, वह मोबाइल नंबर किसी और सुभाष का है। आरोपी सुभाष की गिरफ्तारी के लिए जिस मोबाइल नंबर को इंटरसेप्ट करने की बात पुलिस ने कही है, वह नंबर सुभाष नाम के एक अन्य कर्मचारी का है, जो एसएससी में ही कार्यरत है।
उधर, पुलिस ने रिमांड पेपर में दर्ज फोन नंबर को क्लैरिकल मिस्टेक माना। पुलिस ने यह भी बताया कि एचएसएससी में सुभाष नामक तीन कर्मचारी हैं लेकिन गिरफ्तार सुभाष शर्मा के पास आयोग की परीक्षाओं से संबंधित ब्योरा था, जिसे लीक कर यह पूरा गोरखधंधा चलाया जा रहा था। पुलिस ने कोर्ट में आरोपी सुभाष की गिरफ्तारी से संबंधित कुछ सबूत भी दिखाए। साथ ही कहा कि जांच में अभी सभी सबूतों का खुलासा नहीं किया जा सकता। इस दलील के बाद कोर्ट ने आरोपी सुभाष को न्यायिक हिरासत में भेजने का आदेश दे दिया।
जरूरी सबूत पेश किए
हरियाणा सीएम फ्लाइंग स्क्वॉड के एसपी धीरज सेतिया ने कहा कि बचाव पक्ष ने कोर्ट को गुमराह करने की कोशिश की। हमने कोर्ट में सुभाष की गिरफ्तारी से संबंधित जरूरी सबूत पेश किए। सभी सबूत अंतिम चार्जशीट के साथ कोर्ट में दाखिल किए जाएंगे। अभी जांच चल रही है।
मुख्य आरोपी अनिल का रिमांड दो दिन और बढ़ा
दलीलें सुनने के बाद कोर्ट ने घोटाले के मुख्य आरोपी (मास्टरमाइंड) अनिल शर्मा की रिमांड दो दिनों के लिए बढ़ा दिया जबकि अन्य सातों आरोपियों को न्यायिक हिरासत में भेज दिया। पुलिस ने कोर्ट को बताया कि एचएसएससी की गोपनीय शाखा के असिस्टेंट होने के नाते आरोपी अनिल पर सभी उम्मीदवारों से संबंधित डाटा संभालने की जिम्मेदारी थी लेकिन उसने नियमों को ताक पर रखकर डाटा लीक कर अन्य आरोपियों के साथ भ्रष्टाचार की साजिश में शामिल हो गया, जिसकी पुष्टि हुई है। पुलिस के मुताबिक अनिल ने सात उम्मीदवारों से करीब 22 लाख लिए थे। दो दिन के रिमांड के दौरान असिस्टेंट अनिल से बकाया करीब 17 लाख की रिकवरी की जाएगी।
ये भेजे गए न्यायिक हिरासत में
एचएसएससी भर्ती घोटाले में न्यायिक हिरासत में भेजे गए आरोपियों में बलवान शर्मा, पूर्व मैनपावर प्रोवाइडर धर्मेंद्र, आईटी विंग में कार्यरत पुनीत, गोपनीय शाखा में कार्यरत रोहताश, सिंचाई विभाग के कर्मी सुरेंद्र, गोपनीय शाखा के सुभाष और सुखविंदर हैं।
हिमाचल, पंजाब, राजस्थान तक फैला है दलालों का जाल
हरियाणा में नोट लेकर नौकरी दिलवाने के धंधे में जुटे दलालों के भ्रष्टाचार का जाल हिमाचल, पंजाब व राजस्थान तक फैला हुआ है। सूत्रों के अनुसार ये दलाल इन राज्यों से ताल्लुक रखने वाले युवकों से संपर्क कर उन्हें अपने जाल में फंसाते थे। एसआईटी ने इस दिशा में भी जांच शुरू कर दी है। अभी तक जुटाए गए तथ्यों में हिमाचल प्रदेश के एक युवक का जिक्र सामने आ चुका है। एसआईटी के अनुसार फिलहाल केस में जांच चल रही है। हर पहलु पर एसआईटी गहनता से जांच करेगी।
दरअसल, एचएसएससी के माध्यम से हरियाणा में विभिन्न पदों के लिए जो भी नौकरियां निकलती थीं, उसके लिए निकटवर्ती राज्यों हरियाणा समेत हिमाचल, पंजाब व राजस्थान के युवक भी आवेदन करते थे। इसके बाद शुरू होता था दलालों का काम। ये दलाल इन युवकों से संपर्क कर ऐसे युवकों की तलाश करते थे, जो नौकरी की चाह में नोट देने को तैयार हो जाते थे। ये दलाल इन युवकों को इंटरव्यू में बढ़िया नंबर लगवाने का लालच देकर उन्हें तैयार करते थे।
उसके बाद दलाल इन युवकों का संपर्क आरोपियों से करवाते थे। आरोपी विभिन्न भर्तियों के लिए इंटरव्यू में अच्छे अंक लगवाने का रेट दलालों को बताते थे। युवकों के आग्रह पर उस रेट में बस थोड़ा-बहुत ही ऊपर-नीचे किया जाता था। यदि युवक तय कीमत पर सहमति जता देते तो उन युवकों का इंटरव्यू क्लीयर करवाने की प्रक्रिया शुरू हो जाती थी।
एसआईटी ने जो तथ्य जुटाए हैं। उसमें एक दलाल हिमाचल के युवक का जिक्रआरोपी से कर रहा है।
दलाल ने एक आरोपी को बताया कि हिमाचल वाला कैंडिडेट दो लाख रुपये देने को तैयार है, लेकिन आरोपी ने दलाल से कहा कि उसे रहने दो। इसी दौरान दलाल ने आरोपी को एक अन्य कैंडिडेट की 4 लाख रुपये पेमेंट आने की भी बात बताई। इस पर आरोपी ने दलाल को कहा कि ऐसी बातों के लिए मोबाइल का नहीं, ज्यादातर व्हॉटसअप का प्रयोग किया करो।
चाय की दुकान भी था सेटिंग का अड्डा
अभी तक एसआईटी जांच में ये बात भी सामने आई है कि रिश्वत देकर नौकरी पाने वाले युवक व दलाल कई बार आरोपियों से मिलने की भी बात करते थे। चूंकि आरोपी उनसे रुपये ले चुके होते थे, इसलिए उनके लिए कई बार उनसे मिलना भी जरूरी हो जाता था। इसलिए आरोपी या तो उन्हे देरशाम अपने घर पर, फाटक के पास या फिर हरियाणा स्टाफ सलेक्शन कमीशन कार्यालय के पास किसी चाय की दुकान में भी मिलने को बुला लेते थे। यहां पूरी सेटिंग होती थी और यह तय होता था कि रिश्वत की राशि कैसे, कब और कहां लेनी है।
नौकरी के लिए पैसे देने वाले भी जांच में सहयोग से काट रहे कन्नी
हरियाणा कर्मचारी चयन आयोग में भर्ती घोटाले का खुलासा होने के छह दिन बाद भी दलाल एसआईटी की पहुंच से बाहर हैं। बीते वीरवार को सीएम फ्लाइंग स्क्वॉड ने भले ही हरियाणा कर्मचारी चयन आयोग में छापा मारकर आठ लोगों को गिरफ्त में ले लिया हो, लेकिन उसके बाद दलालों और बिचौलियों तक पहुंचने में पुलिस नाकाम रही है। सूत्रों के अनुसार आयोग के कर्मचारियों ने पैसे ऐंठकर नौकरी देने को लेकर सौ से अधिक लोगों को शिकार बनाया है, मगर अभी तक सात से आठ युवक ही सामने आए हैं।
इनमें से तीन ने ही अपने बयानों को कलमबद्घ कराया है। ऐसे में एसआईटी की चुनौतियां भी बढ़ती जा रही हैं। जांच के दौरान गिरोह की ठगी का शिकार हुए युवकों और पैसे देकर नौकरी पाने वालों से संपर्क साधने में एक तो काफी कठिनाई हो रही है, साथ ही ठगी का शिकार अनेक युवक जांच में शामिल होने से भी कन्नी काट रहे हैं। इसे देखते हुए एसआईटी ने जांच का दायरा बढ़ाने का निर्णय लिया है।
एसआईटी पैसे देने वाले सभी युवकों के नंबर जुटाकर उनसे संपर्क कर जांच में शामिल होने का आग्रह करेगी ताकि घोटाले के आरोपियों को कड़ी सजा दिलाई जा सके। इसके साथ ही उनसे बिचौलियों और दलालों के बारे में भी साक्ष्य जुटाए जाएंगे। किन-किन लोगों के जरिए उन्होंने आयोग के कर्मचारियों को पैसे पहुंचाया है या किसने इंटरव्यू में अच्छे नंबर दिलाने का प्रलोभन दिया, ये भी जानकारी जुटाई जाएगी। कुल कितने युवक ठगी का शिकार हुए हैं, उनका भी सही आंकड़ा जुटाया जा रहा है।
जो भी ठगी का शिकार युवक आएगा सामने, दर्ज कराएंगे बयान
एसआईटी में शामिल अधिकारियों ने बताया कि गिरोह की ठगी का शिकार जो भी युवक सामने आएगा या जांच में शामिल होगा, उसके बयान दर्ज कराए जाएंगे। पैसे देने के बाद भी कई युवकों के इंटरव्यू में अच्छे नंबर नहीं लगे हैं। जांच का दायरा बढ़ने से कड़ी दर कड़ी जुड़ने से अनेक नाम सामने आ सकते हैं।
पैसे लेकर युवकों को गच्चा दे जाते थे घोटालेबाज
हरियाणा स्टाफ सलेक्शन कमीशन के तहत सरकारी नौकरियां दिलवाने का लालच देकर दलाल पैसे लेकर भी युवकों को गच्चा दे जाते थे। दलाल युवकों से इंटरव्यू में अंक लगवाने के नाम पर भी धोखाधड़ी तक करते थे। एसआईटी ने अपनी प्रारंभिक जांच में ऐसा भी एक मामला पकड़ा है। एसआईटी अब अपनी जांच को आगे बढ़ाने केलिए दलालों के जरिए पैसे देकर नौकरी पाने वाली युवकों तक पहुंचनी शुरू कर रही है।
एसआईटी को शुरुआती दौर में कुछ कामयाबी भी मिली है। एसआईटी को ऐसे दो युवक मिले हैं, जिन्होंने दलालों को नौकरी के लिए लाखों रुपये दिए थे। एसआईटी इन युवकों के जरिए जांच की कड़ियों को आगे बढ़ा रही है। लेकिन एसआईटी को एक युवक ऐसा भी मिला है, जो दलालों और आरोपियों की धोखाधड़ी का शिकार होते-होते बचा।
एसआईटी ने इस युवक को भी अपनी जांच का हिस्सा बनाया है। एसआईटी सूत्रों के अनुसार इस युवक से भी एक दलाल ने इंटरव्यू में अच्छे अंक लगवाने केलिए सेटिंग की थी।
युवक से कहा गया था कि उसके इंटरव्यू में 20 अंक लगा दिए गए हैं और इसके लिए 5 लाख रुपये लगेंगे। उसके बाद उसका नाम मेरिट सूची में आ जाएगा और उसकी नौकरी पक्की हो जाएगी। डील होने के बाद दलाल ने युवक से कहा कि उसके इंटरव्यू में 20 अंक लगवा दिए हैं, इसलिए अब वह जल्द से जल्द 5 लाख रुपये की पेमेंट करे। दलाल लगातार युवक पर पेमेंट के लिए दबाव बना रहा था और युवक इसके लिए थोड़ा वक्त मांग रहा था। तभी इंटरव्यू का रिजल्ट आउट हुआ तो ये बात सामने आई कि संबंधित युवक को तो इंटरव्यू में केवल 10 ही अंक मिले हैं।
तीन गवाह मिले, कराए 164 के बयान
हरियाणा स्टाफ सलेक्शन कमीशन (एचएसएससी) में भर्ती घोटाले की जांच कर रही एसआईटी को बड़ी सफलता मिली है। अब तक तकनीकी उपकरण और मोबाइल सर्विलांस पर टिकी जांच में अब गवाह भी सामने आ गए हैं। कई दिन चली तलाश के बाद मिले तीन पीड़ितों ने कोर्ट में 164 के तहत ब्यान दर्ज कराए हैं। तीनों ही गवाहों ने आरोपी अनिल के खिलाफ गवाही दी जोकि एचएसएससी की गोपनीय विभाग में तैनात था। तीन में से एक पीड़ित तो ऐसा है, जिसने अपने एक रिश्तेदार को क्लर्क की नौकरी पर लगवाने के लिए पत्नी के गहने तक गिरवी रख दिए।
उक्त पीड़ित ने कोर्ट में गवाही दी है कि अनिल ने लिखित परीक्षा में नंबर बढ़वाने के लिए चार लाख रुपये लिए थे जबकि आवेदक ने जो परीक्षा दी थी, उसकी उत्तर कुंजी (आंसर की) में नंबर सेम थे। वहीं, दूसरे गवाह ने भी अनिल पर रोडवेज में ड्राइवर की भर्ती करवाने के नाम पर दो लाख रुपये की ठगी का आरोप लगाया है। वहीं, तीसरे गवाह ने बयान दिया है कि दो लोगों की नौकरी लगवाने के बदले उसे साढ़े सात लाख रुपये देने थे, लेकिन उसके पैसे बच गए क्योंकि पैसे देने से पहले ही आरोपी पकड़े गए।
मूलरूप से पानीपत के रहने वाले व्यक्ति ने बयान दिया है कि उसके एक रिश्तेदार ने (विचाराधीन रिजल्ट में नाम नहीं उजागर किया जा सकता) हरियाणा रोडवेज में क्लर्क के पद के लिए लिखित परीक्षा दी थी। एक व्यक्ति के माध्यम से उसकी मुलाकात अनिल से हुई, जिसने कहा कि वह परीक्षा के नंबर बढ़वाकर उसके रिश्तेदार को पास करवा सकता है। इसके बदले अनिल ने पैसों की डिमांड रखी तो उसने अपनी पत्नी के गहने गिरवी रखकर चार लाख रुपये अनिल को दे दिए। हालांकि जब बाद में लिखित परीक्षा का रिजल्ट आया तो आंसर की से नंबर का मिलान करने पर उतने ही नंबर आए थे, जितने प्रश्न आवेदक ने हल किए थे। रिजल्ट आने से तीन दिन पहले ही उन्होंने पैसे दिए थे।
जो लिखित परीक्षा में पास था, उसके रिश्तेदार से लिए दो लाख
अनिल के खिलाफ दूसरी गवाही सोनीपत निवासी एक व्यक्ति ने दी है। उसने बयान में कहा कि अनिल को वह पहले से ही जानते हैं और उन्होंने अपने एक रिश्तेदार की नौकरी हरियाणा रोडवेज में ड्राइवर के पद पर लगवाने की बात कही। उनके रिश्तेदार ने लिखित परीक्षा पास कर ली थी। इंटरव्यू में पास करवाने का वादा कर अनिल ने उनसे साढ़े तीन लाख रुपये मांगे। 10 मार्च 2018 को उन्होंने जीरकपुर में अनिल को दो लाख रुपये दिए और डेढ़ लाख बाद में देने की बात तय हुई थी।
दो नौकरियों के मांग रहा था साढ़े सात लाख, बच गए पैसे
सिरसा के रहने वाले एक व्यक्ति ने भी अनिल के खिलाफ कोर्ट में 164 के बयान दर्ज कराए हैं। उन्होंने कहा है कि एक स्टाफ नर्स और एसए के पद पर उसके दो रिश्तेदारों की नियुक्ति हुई लेकिन अनिल लगातार फोन कर यह कहता रहा कि नौकरी उसने लगवाई है। इसके बदले वह साढ़े सात लाख रुपये मांग रहा था, जोकि उसने दिए नहीं और इसी बीच अनिल को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया। ऐसे में उसके पैसे बच गए।
इस प्रकरण में तीन गवाह सामने आए हैं, जिनसे नौकरी के बदले पैसे लिए गए या लिए जाने थे। तीनों गवाहों के कोर्ट में 164 के बयान दर्ज हो गए हैं। बयान देने वाले अभियोजन पक्ष के गवाह होंगे। हमारी तफ्तीश जारी है और जितने भी पीड़ित हम तलाश पाएंगे, उनकी गवाही दर्ज कराई जाएगी।
- धीरज सेतिया, एसपी सीएम फ्लाइंग स्कवॉयड, पंचकूला, हरियाणा