CM Parkash singh badal & Sukhbir singh badal
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श्री अकाल तख्त साहिब के जत्थेदार ने शिअद के प्रकाश सिंह बादल, सुखबीर बादल और 40 सिख नेताओं को पेश होने का हुक्मनामा जारी किया है। 40 सिख नेताओं की यह लिस्ट सरबत खालसा ने तैयार की है और 30 मार्च को पेश होने के लिए कहा गया है। इन सिख नेताओं पर डेरों पर जाकर अपने पक्ष के लिए वोट मांगने का आरोप है। भाई ध्यान सिंह मंड ने कहा कि इन सिख नेताओं से स्पष्टीकरण लेने के बाद ही फैसला सुनाया जाएगा।
इन 40 सिख नेताओं में शिरोमणि अकाली दल (बादल), कांग्रेस व आम आदमी पार्टी के नेता भी शामिल हैं। जिनमें पूर्व सीएम सरदार प्रकाश सिंह बादल ,पूर्व डिप्टी सीएम सरदार सुखबीर सिंह बादल और सिकंदर सिंह मलूका का परमिंदर सिंह ढींढसा, सुरजीत सिंह रखड़, दिलराज सिंह, गुलजार सिंह आदि हैं। भाई ध्यान सिंह मंड ने कहा कि शिअद-भाजपा की हार के पीछे मुख्य कारण है पंथ से धोखा।
इन सिख नेताओं ने जहां डेरों पर जाकर वोट मांगे वहीं श्री गुरू ग्रंथ साहिब जी की बेअदबी को लेकर कोई ठोस कदम नही उठाया। सिख कौम को जब फरमान जारी हुआ था कि किसी भी डेरे पर जाकर वोट नहीं मांगेगे तो इन सिख नेताओं ने श्री अकाल तख्त साहिब जी के फरमान को नकारा है, सिख धर्म में ऐसी गल्तियों के लिए सजा का प्रावधान है। सभी 40 सिख नेताओं को 30 मार्च को स्पष्टीकरण के लिए बुलाया गया है।
भाई ध्यान सिंह ने कहा कि कांग्रेस सरकार से उन्हें कोई आस नही है, लेकिन अगर सीएम कैप्टन अमरिंदर सिंह श्री गुरू ग्रंथ साहिब जी की बेअदबी को लेकर ठोस कानून लाते हैं तो हम उनका स्वागत करेंगे। आम आदमी पार्टी केवल पंजाब में सत्ता पाने के लिए हथकंडे अपना रही थी, जिसका जवाब पंजाब ने उन्हें दे दिया है।
विपक्ष में बैठने लायक नहीं रही शिअद
सुखबीर सिंह बादल
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भाई ध्यान सिंह ने कहा कि शिअद अब विपक्ष में भी बैठने के लायक इस लिए नहीं रही, क्योंकि शिअद नेताओं ने श्री गुरू ग्रंथ साहिब जी की बेअदबी करने वालों को सजा नहीं दिला सकी बल्कि धर्म के सत्कार के लिए सड़कों पर उतरे सिख युवकों पर गोलियां चलवा दी। बादल सरकार का फेल होने के पीछे धर्म को सियासत का खिलौना बनाया जाना भी शामिल है। कांग्रेस सत्ता में आई है। पंजाब में भाईचारा रहे, धर्म का अनादर न हो और योग्य शासन मिले यह पंजाब चाहता है।
पूर्व सीएम व डिप्टी सीएम को पंथ से निष्कासन तय!
कई बार सरबत खालसा के श्री अकाल तख्त साहिब से जारी फरमान को अधिक तव्वजों नहीं दी गई। सिकंदर सिंह मलूका ने तो यहां तक कहा था कि मैं सरबत खालसा के जत्थेदारों का फरमान नहीं मानता। श्री अकाल तख्त साहिब के एक ही जत्थेदार हैं और वो हैं ज्ञानी गुरबचन सिंह।
ऐसे में क्या 30 मार्च को पूर्व सीएम व डिप्टी सीएम श्री अकाल तख्त साहिब में पेश होने की उम्मीद नहीं दिख रही है, क्योंकि सिख पंथ में श्री अकाल तख्त साहिब को सर्वोपरि माना जाता है और सिख का बड़ा धड़ा श्री अकाल तख्त साहिब के जत्थेदार ज्ञानी गुरबचन सिंह को ही मानता है।
उधर, सरबत खालसा के चुने गए जत्थेदार भाई ध्यान सिंह मंड कहते हैं कि हुक्म न मानने वाला सिख पंथ से निष्काषित किया जा सकता है। ऐसे में संभावना बढ़ रही है कि सरबत खालसा के चुने गए जत्थेदार ध्यान सिंह मंड 30 मार्च को पूर्व सीएम व डिप्टी सीएम समेत 40 सिख नेताओं को (हुक्म न मानने वाले सिख नेताओं) को पंथ से निकालने की घोषणा कर दे।