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Chandigarh News: पीजीआई में सस्ती दवा का सपना कैसे होगा साकार, डाक्टरों को है ब्रांडेड से प्यार

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चंडीगढ़। मरीजों को जेनेरिक दवाएं उपलब्ध कराने के लिए यूटी प्रशासन के साथ ही पीजीआई प्रशासन लगातार प्रयास कर रहा है। जेनरिक दवाएं लिखने के लिए डॉक्टरों पर दबाव भी बनाया जा रहा है। जीएमसीएच- 32 और जीएमएसएच- 16 में तो कुछ हद तक बदलाव नजर आने लगा है। लेकिन पीजीआई के डॉक्टरों का ब्रांडेड मोह छूटता नजर नहीं आ रहा। पीजीआई की न्यू ओपीडी समेत अन्य ओपीडी में अब भी मरीजों को धड़ल्ले से ब्रांडेड दवाएं बिना किसी डर के लिखी जा रही हैं। पीजीआई प्रशासन की चेतावनी के बावजूद वहां सस्ती की बजाय महंगी दवाओं से इलाज किया जा रहा है। बता दें कि पिछले कुछ दिनों में पीजीआई प्रशासन ने जेनरिक दवाओं को लेकर कई आदेश जारी किए हैं। उन सभी आदेशों में डॉक्टरों को जेनेरिक दवाएं लिखने का निर्देश दिया गया है। लेकिन उसका पालन सुनिश्चित कराना परेशानी का सबब बना हुआ है क्योंकि परिसर की दुकानों पर जेनेरिक दवाओं की उपलब्धता अब तक नहीं हो पाई है। ओपीडी और गोल मार्केट की जन औषधि केंद्रों पर मरीज चक्कर काटने के बाद ब्रांडेड दवाएं लेकर लौट रहे हैं। स्थिति यह है कि जन औषधि केंद्रों पर मांग के अनुरूप आपूर्ति न होने से भी परेशानी हो रही है।
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इनसेट
पीजीआई के शोध को लेकर चर्चा जोरों पर
पीजीआई अपने द्वारा किए गए शोध को लेकर भी इन दिनों काफी चर्चा में है। इसमें यह बताया गया है कि जेनेरिक दवाएं ब्रांडेड की तुलना में कम कारगर हैं। ऐसे में पीजीआई के डॉक्टर भी उस शोध की हिमायत कर रहे हैं। इस शोध की चर्चाओं को शांत करने के लिए पीजीआई निदेशक प्रो. विवेक लाल ने पिछले दिनों संस्थान में कार्यक्रम कर जेनेरिक दवाओं का गुणगान तक करना पड़ा है।
इनसेट-
जल्द ठीक होहा है, ब्रांडेड ही लिख दो साहब
अब तो पीजीआई के डाॅक्टर ही कह रहे हैं ही जेनरिक दवाएं कम असर करती हैं। हमें तो जल्दी से ठीक होना है इसलिए कहकर ब्रांडेड लिखवाते हैं।
-दीपक सिंह, कुरुक्षेत्र
सस्ती दवाएं लिखते हैं तो मिलती नहीं
डॉक्टर जो सस्ती दवाएं लिखते हैं वह दुकान पर नहीं मिलती हैं। इसलिए हम पहले ही कह देते हैं कि वही दवा लिखे जो आसानी से मिल जाए।
-आशा शर्मा, मलोया

कोट- जेनरिक दवाओं से संबंधित आदेश में साफतौर पर सभी डाॅक्टरों को निर्देश दिया गया है कि ब्रांड की बजाय दवा का साल्ट नाम लिखे। निर्देश की अवहेलना करने वाले पर मानकों के अनुसार कार्रवाई की जाएगी। पीजीआई प्रशासन इसकी अपने स्तर पर भी जांच कर रहा है।
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-कुमार गौरव, डीडीए व प्रवक्ता पीजीआई
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