10 जनवरी को होने वाले मेयर, सीनियर डिप्टी मेयर व डिप्टी मेयर पद के चुनाव के लिए भाजपा और कांग्रेस ने अपने-अपने उम्मीदवार उतार दिए हैं। कांग्रेस के पास खोने के लिए कुछ नहीं है, लेकिन पाने के लिए काफी कुछ है। पिछले साल मेयर चुनाव में कांग्रेस ने कुछ भी नहीं खोया बल्कि बिना चुनाव किए ही सतीश कैंथ के रूप में एक पार्षद मिल गया था। भाजपा को क्रास वोटिंग का डर सता रहा है।
शहर में चर्चा है कि क्रॉस वोटिंग से भाजपा कैसी बचेगी। कांग्रेस यही चाह रही है। पिछले साल चुनाव में भाजपा के पार्षद सतीश कैंथ ने बगावत कर मेयर का चुनाव लड़ा था। सतीश कैंथ को 11 मत पड़े थे। उस वक्त कांग्रेस के चार पार्षद थे। भाजपा से निकाले जाने के बाद सतीश कैंथ कांग्रेस में शामिल हो गए।
मेयर पद के चाह्वानों में से एक को उम्मीदवार बनने का मौका मिला है। अब जिन्हें नहीं मिला उन्हें और उनके समर्थकों को मनाने की कोशिश जारी है। कांग्रेस ने भी अपनी गतिविधियां तेज कर दी हैं। कांग्रेस पार्षद सतीश कैंथ का कहना है कि हमारे तीनों उम्मीदवारों की जीत पक्की है। यह पूछे जाने पर कि आपकी संख्या बहुत ही कम है फिर कैसे जीतेंगे।
इस पर कैंथ का कहना है कि पिछले बार के मेयर चुनाव में उन्हें 11 मत मिले थे। जो कमी है, वह इस साल पूरी हो जाएगी। नगर निगम के सभी पार्षद बड़े समझदार हैं। उन्हें पता है कि क्या करना है। भाजपा अपने पार्षदों को बचाने में लगी हुई है। हमारे सभी पांच पार्षद एकजुट हैं।