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जानिए, कैसे बचें हार्ट अटैक से

Tue, 15 Apr 2014 01:45 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
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नेशनल हार्ट फेल्यर समिट में कई चौंकाने वाले रिजल्ट सामने आए हैं। कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. एचके बाली ने बताया कि समिट में सबसे बड़ी बात यह सामने आई है कि यूथ, महिलाओं, पोस्ट-बायपास मरीज और 80 साल से ज्यादा उम्र के लोगों में हार्ट अटैक की समस्याएं बढ़ रही हैं।
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अक्सर ऐसा माना जाता था कि यह बीमारी महिलाओं में 45 वर्ष की उम्र के बाद होती है, पर अब ऐसा नहीं है। वे लोग जिन्हें दिल से जुड़ी कोई दिक्कत नहीं होती थी, वे भी अब अचानक हार्ट अटैक का शिकार हो रहे हैं।

डॉ. बाली के नेतृत्व में द हार्ट फाउंडेशन की तरफ से आयोजित इस समिट में देश-विदेश से 500 प्रतिनिधि और 113 फैकल्टी मेंबर्स ने हिस्सा लिया।

हार्ट अटैक के 90 मिनट महत्वपूर्ण
समिट में यह माना गया कि तकनीक तो आगे बढ़ रही है पर दूर-दराज के इलाकों में डॉक्टर्स और मरीज सुविधाओं से वंचित हैं। ऐसे में निष्कर्ष निकाला गया कि ‘फार्माको-इन्वेसिव’ अप्रोच काम आएगी। डॉ. बाली ने बताया कि उन इलाकों में अगर मरीज को हार्ट-अटैक आता है तो उन्हें क्लॉट बर्स्टर के तौर पर दवाएं दी जानी चाहिए, ताकि आर्टरी का उपचार शुरू करने के लिए वक्त मिल सके।
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डॉ. बाली ने जोर देते हुए कहा कि अटैक आने से 90 मिनट तक का वक्त सबसे महत्वपूर्ण होता है। इतने में अगर कलाई से आर्टरी का उपचार शुरू कर दिया जाए तो किसी भी तरह के मरीज की जान बचाई जा सकती है।

कलाई के जरिए एंजियोप्लास्टी फायदेमंद
डॉ. बाली ने जानकारी दी कि 2011 से अब तक हमारी यूनिट 270 मरीजों में हार्ट अटैक के दौरान कलाई के जरिए एंजियोप्लास्टी (रेडियल-एंजियोप्लास्टी) कर चुका है और परिणाम बेहतर आए हैं। जरूरत है कि हार्ट अटैक के दौरान एंजियोप्लास्टी करने के लिए डॉक्टर्स रेडियल-एंजियोप्लास्टी की तरफ रुख करें।

एक्सपर्ट्स ने माना है कि वैनेश़िग स्टंट्स बेहतर हैं। इन सभी बातों का फायदा तभी है जब मरीज, उसके परिवार, सरकार की तरफ से पूरा सपोर्ट डॉक्टर्स को मिले और लोगों को समय-समय पर तकनीक के बारे में जागरूक किया जाए। समिट में कश्मीर, उत्तराखंड के अंदरूनी इलाकों से डॉक्टर आए थे जो अपने-अपने इलाकों में जागरूकता फैलाने के लिए काम कर रहे हैं।

ये हैं हार्ट अटैक के लक्षण
छाती के बीचों-बीच तेज दर्द उठना, ऐसा लगना जैसे किसी हाथी ने अपना पैर आपकी छाती पर रख दिया हो। यह भारीपन धीरे-धीरे कंधों और फिर जबड़े के निचले हिस्से तक पहुंचता है। यह सब ज्यादा फिजिकल एक्सरसाइज करने से भी हो सकता है पर यदि अचानक हो तो तुरंत डॉक्टर से मदद लें।

ऐसे बचे अटैक से
डॉ. बाली ने बताया कि लाइफस्टाइल ही सबसे बड़ी वजह है। सिगरेट पीने से लेकर एक्सरसाइज न करना, स्ट्रेस होना वगैरह सब वजह हैं। उन्होंने सलाह दी कि जितना वक्त हो सके कसरत को दें। डाइट बेहतर करें, खाने में कोलेस्ट्रॉल कम करें, अपने काम को प्लान करें। फुरसत के पल निकालकर दोस्तों और परिवार के साथ वक्त बिताएं।
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