-क्या प्रदेश में स्टिल्ट प्लस 5 मंजिल वाली इमारतों को हरियाणा सरकार मंजूरी दे रही है : हाईकोर्ट
-पूर्व सीनियर डिप्टी मेयर व पूर्व पार्षद की इमारत को मंजूरी मामले में हाईकोर्ट सख्त
-बिल्डिंग प्लान को दी गई मंजूरी व मंजूरी वापस लेने से जुड़ा ब्योरा हाईकोर्ट ने किया तलब
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने एक जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए अब पूरे गुरुग्राम में मौजूद स्टिल्ट प्लस 4 से अधिक रिहायशी इमारतों का ब्योरा सौंपने का नगर निगम को आदेश दिया है। इसके साथ ही पूर्व सीनियर डिप्टी मेयर व पार्षद की विवादित इमारत को मंजूरी देने और इसे वापस लेने से जुड़ा ब्योरा सौंपने भी हरियाणा सरकार को निर्देश दिया है।
याचिका दाखिल करते हुए यशपाल अरोड़ा ने एडवोकेट अशोक त्यागी व गौरव त्यागी के माध्यम से हाईकोर्ट के समक्ष राजनीतिक दबाव में नियमों का उल्लंघन कर बिल्डिंग प्लान को मंजूरी देने का मामला उठाया था। याची ने बताया था कि पूर्व सीनियर डिप्टी मेयर यशपाल बत्रा, उनकी पत्नी व पूर्व पार्षद मधु बत्रा से जुड़ी एक इमारत का बिल्डिंग प्लान गलत तरीके से मंजूर किया गया था। इस भवन में स्टिल्ट प्लस 5 मंजिल से अधिक का निर्माण किया गया था। बार-बार शिकायतों के बावजूद अधिकारियों ने कार्रवाई नहीं की और जब सीएम विंडो व उच्चाधिकारियों से शिकायत की गई तब जाकर मंजूरी वापिस ली गई लेकिन कोई कार्रवाई नहीं की गई। हाईकोर्ट ने कहा कि ऐसा प्रतीत होता है कि दोनों पक्षों के बीच का कोई आपसी विवाद है लेकिन यह विषय जनहित से जुड़ा हुआ है। ऐसे में हाईकोर्ट ने इस मामले में की गई कार्रवाई का पूरा ब्योरा तलब कर लिया है। साथ ही हरियाणा सरकार से पूछा है कि क्या प्रदेश में स्टिल्ट प्लस 5 मंजिल वाली इमारतों को शहरी इलाकों में मंजूरी दी जा रही है। साथ ही नगर निगम से पूछा है कि पूरे गुरुग्राम में ऐसी कितनी इमारतें हैं जिनमें स्टिल्ट प्लस 4 से अतिरिक्त मंजिल मौजूद हैं। इन इमारतों के बारे में विस्तृत ब्योरा सौंपने का हाईकोर्ट ने नगर निगम को आदेश दिया है।