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Chandigarh: सेक्टर-20 में खंडहर हो गए कई मकान, मरम्मत कौन कराएगा...उलझे प्रशासन और नगर निगम

Mon, 18 Nov 2024 03:34 PM IST
निवेदिता वर्मा रिशु राज सिंह, अमर उजाला, चंडीगढ़

सार

सेक्टर 20 में रहने वाले लोगों ने बताया कि यहां कई मकानों के ताले तोड़े गए हैं और असामाजिक तत्व इनमें रात और दिन में आकर नशा करते हैं। कुछ लोग तो बिना अलॉट हुए ही रह रहे हैं। पूरी कॉलोनी में झाड़ियों की भरमार है। पार्क की जगह जंगल बन चुके हैं। कारण है कि कभी कोई घासों की कटाई करने ही नहीं आया। फुटपाथ भी टूटे हुए हैं।
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सेक्टर 20 के हालात - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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चंडीगढ़ सेक्टर-20ए का एक इलाका, जिसमें करीब 250 से 300 मकान हैं, प्रशासन और नगर निगम के लिए पहेली बन गया है। दो वर्षों से यह ही स्पष्ट नहीं हो पा रहा है कि इसकी जिम्मेदारी किसकी है। प्रशासन, नगर निगम पर डाल रहा है तो निगम का कहना है कि उन्होंने पहले कभी मरम्मत नहीं कराई तो अब क्यों कराएं। इस विवाद में कई लोगों की जिंदगी दांव पर लगी है, क्योंकि जिन मकानों में वह रह रहे हैं, वे जर्जर हो चुके हैं। कुछ की दीवारें तो गिर भी चुकी हैं। सड़कें टूटी, पार्क जंगल बन चुके हैं।

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अमर उजाला ने सेक्टर-20ए के इस एरिया का दौरा किया। यहां एक बाउंड्री के अंदर तीन ब्लॉक हैं। एक ब्लॉक, जिसे पुलिस कॉलोनी के नाम से जाना जाता है। सबसे बुरी स्थिति में यही है और लगभग सभी मकान खंडहर हो चुके हैं। सभी लोग इन मकानों को छोड़ चुके हैं। दूसरे ब्लॉक में पब्लिक हेल्थ के कर्मचारी रहते हैं तो तीसरा ब्लॉक पंजाब-हरियाणा के जनरल कर्मचारियों के लिए हैं। यहां कुल करीब 250 से 300 छोटे मकान हैं। इस कॉलोनी के अंदर प्रवेश करते ही सड़कों पर बड़े-बड़े गड्ढे हैं। ऐसे लगता है कि कई वर्षों से इनकी मरम्मत ही नहीं हुई। 

पुलिस कॉलोनी जो अब पूरी तरह के खंडहर हो चुकी है लेकिन अंदर कई घरों में पानी और बिजली का कनेक्शन है। जब अमर उजाला की टीम पहुंची तो एक खंडहर मकान के अंदर ही कुछ लोग बैठे हुए थे और हुक्का पी रहे थे। 

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टीन डालकर झुग्गियां भी बनाई, रात में घूमते हैं नशेड़ी

ये कॉलोनी एक बाउंड्री बॉल के अंदर है। दीवार छोटी है और कई जगह से टूटी हुई है। अंदर घुसने के कई रास्ते हैं। कई लोगों ने बताया कि तीनों ब्लॉक में जो खाली मकान हैं, उनमें शहर के दूसरे हिस्सों से आकर नशेड़ी नशा करते हैं। यह यहां रहने वाले लोगों ने कहा कि प्रशासन को तुरंत इन खाली मकानों पर ताला लगाना चाहिए ताकि कोई उनका मिसयूज न करे। बिना अलॉटमेंट के भी कुछ लोग रह रहे हैं, उनकी भी जांच की जानी चाहिए। कॉलोनी के अंदर कई गाड़ियां भी डंप की हुई खड़ी हैं, जिन्हें देखकर ऐसा लग रहा है कि वह महीनों से खड़ी हैं। कई लोगों ने अवैध रूप से सरकारी जमीन पर ही टीन डालकर झुग्गियां भी बना ली हैं।

जुलाई 2022 में प्रशासन ने सड़क, पार्कों का जिम्मा निगम पर डाला

जुलाई 2022 में स्थानीय पार्षद के साथ प्रशासन के अधिकारियों ने इलाके की विजिट की थी। वह भी अव्यवस्था देखकर हैरान हुए थे। मौके पर अधिकारियों ने कुछ निर्देश दिए और कुछ मरम्मत का काम शुरू भी हुआ लेकिन वह भी बीच में ही रुक गया। जो बिजली के डिब्बे लगे, उनमें तारें नहीं डाली गईं। कुछ दिन बाद ही प्रशासन के चीफ इंजीनियर की तरफ से निगम के आयुक्त को पत्र लिख दिया गया था कि रोड, पार्किंग और ग्रीन एरिया की जिम्मेदारी नगर निगम की है।

एक-दूसरे की बता रहे जिम्मेदारी

इस मुद्दे को लेकर प्रशासन के इंजीनियरिंग विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि निगम ही साफ-सफाई और अंदरूनी सड़कों का काम देखता है, इसलिए उन्हें ही उस कॉलोनी में काम करने हैं। नगर निगम में चीफ इंजीनियर नए आए हैं तो सुपरिंटेंडिंग इंजीनियर स्तर के एक अधिकारी ने बताया कि एरिया उनके अंदर आता है या नहीं, इसे लेकर थोड़ा असमंजस है लेकिन वे सोमवार को मामले की विस्तृत रिपोर्ट मंगवाएंगे और सड़कों को ठीक करने व अन्य कामों की जांच कर पूरा कराया जाएगा।

आधे लोग मकान छोड़कर जा चुके हैं 

एरिया पार्षद तरुणा मेहता ने कहा कि पिछले दो साल से वह प्रशासन के अधिकारियों से मिलकर हालात के बारे में अवगत करा रही हैं। चीफ इंजीनियर और प्रशासन के उच्च अधिकारियों को मौजूदा हालात दिखाने के लिए यहां विजिट भी कराई। नगर निगम के अधिकारी बोलते हैं, ये हमारा एरिया नहीं है। प्रशासन के अधिकारी करते नहीं है। एरिया में पार्क, लाइट, सड़क और सीवरेज आदि का काम करने के लिए नगर निगम को देने के लिए आग्रह किया। इस संबंध एक पत्र चीफ इंजीनियर सीबी ओझा की ओर से निगम को लिखकर भी दिया गया लेकिन नगर निगम ने उसे नकार दिया कि इस तरह के पत्र के कोई मायने नहीं है। ये बात भी प्रशासन के अधिकारियों को बताई लेकिन कोई भी विभाग इन मकानों की ओर ध्यान नहीं दे रहे हैं। मेहता ने कहा कि वह अपने फंड से भी काम नहीं करवा पा रही हैं। यहां के निवासी परेशानी में हैं। आधे लोग मकान छोड़कर जा चुके हैं। कॉलोनी नशेड़ियों का अड्डा बन चुकी है। बिना अलॉटमेंट के लोग गैर कानूनी ढंग से रह रहे हैं।

बरसातों में तिरपाल लगाकर घर में रहना पड़ता है

घर के सामने सड़क इस कदर टूटी है कि गाड़ी पूरी तरह से हिल जाती है। मकान जर्जर हैं। कई बार शिकायत की है लेकिन कोई देखने नहीं आता। हालात इतने खराब हैं कि कोई झाड़ू लगाने तक नहीं आता। मैं 2010 से रह रहा हूं। बरसातों में तिरपाल लगाकर घर में रहना पड़ता है। मजबूरी में इन हालातों में रहना पड़ रहा है। - देशराज, निवासी मकान नंबर-844, सेक्टर-20ए

गांवों में भी इतनी अव्यवस्था नहीं होती

एक साल पहले निगम के आयुक्त को समस्याओं को लेकर ज्ञापन देकर आए लेकिन आजतक कोई देखने तक नहीं आया। पार्क जंगल बने हुए हैं। मकानों की हालत ऐसी है कि कभी भी गिर सकते हैं। बहुत ज्यादा गंदगी है। कूड़ा कई-कई दिनों में नहीं उठता है। ये तो लगता ही नहीं है कि शहर का हिस्सा है। गांवों में भी इतनी अव्यवस्था नहीं होती है। - मोनू, निवासी मकान नंबर-847, सेक्टर-20ए

पार्कों में बैठने के लिए एक कुर्सी तक नहीं

मेरे घर के सामने ही पार्क की ग्रिल टूटी हुई है। लाइटें नहीं जलती हैं। इससे लोगों को खतरा बना रहता है। पार्क में गंदगी है। बैठने के लिए एक कुर्सी तक नहीं है। मकानों की हालत तो खराब है ही। मुझे करीब ढाई साल यहां रहते हुए हो गया है लेकिन हमेशा यहां अव्यवस्था ही रही है। सड़कों की हालत भी खराब है। - अमित, निवासी मकान नंबर-848, सेक्टर-20ए
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