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नक्शे में एससी-एसटी ब्वॉयज हॉस्टल, जमीन पर कुछ नहीं, जांच में जुटा पंजाब यूनिवर्सिटी प्रशासन

Thu, 17 Dec 2020 10:53 AM IST
निवेदिता वर्मा सुशील कुमार, अमर उजाला, चंडीगढ़
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पंजाब यूनिवर्सिटी के बाहर लगा नक्शे में दिख रहा एससी-एसटी ब्वायज हास्टल (लाल घेरे में)। - फोटो : अमर उजाला
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चंडीगढ़ में पंजाब विश्वविद्यालय के नक्शे में एससी-एसटी ब्वॉयज हॉस्टल है लेकिन अफसरों को जमीन पर नहीं मिला। दरअसल पंजाब यूनिवर्सिटी के गेट नंबर एक पर गाइड मैप ऑफ पंजाब विश्वविद्यालय लगा हुआ है। यही नक्शा पीयू में कई स्थानों पर लगा हुआ है। यह इसलिए लगाया गया है कि कोई भी व्यक्ति पूरे कैंपस की स्थिति इसके जरिए जान सके। कौन से भवन और विभाग, हॉस्टल कहां पर स्थित हैं, यह देख सके। 

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इस नक्शे को हाल ही में कुछ वरिष्ठ शिक्षकों ने देखा तो पता चला कि ब्वॉयज हॉस्टल नंबर छह के पास एससी-एसटी ब्वॉयज हॉस्टल दर्शाया गया है। इसी के पास वार्डन हाउस नंबर सात व आठ लिखा है। जब इसकी पड़ताल की गई तो दिखाई गई जगह पर कुछ नहीं मिला। वहां पेड़-पौधे लगे हुए हैं। यह बात पीयू में चर्चा का विषय बन गई। तमाम लोगों ने गेट नंबर एक पर जाकर नक्शे को देखा तो वह भी हैरत में पड़ गए। 


अब यह अंदाजा लगाया जा रहा है कि कार्यरत हॉस्टलों में से ही कोई न कोई हॉस्टल एससी-एसटी वर्ग के लिए होगा या फिर इसका प्लान मंजूर हुआ हो लेकिन निर्माण नहीं किया गया हो। तमाम सवाल जो खड़े हुए हैं उनकी तफ्तीश पीयू प्रशासन कर रहा है। यह भी देखा जा रहा है कि जो हॉस्टल बने हुए हैं कहीं उन्हीं में से तो किसी हॉस्टल को एससी-एसटी के विद्यार्थियों के लिए तो नहीं बनाया गया, जिसकी जानकारी किसी को नहीं है।
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वहीं केंद्र सरकार ने हाल ही में पीयू से पूछा है कि एससी-एसटी के विद्यार्थियों के लिए कितने हॉस्टल हैं और उनमें कितने विद्यार्थी रहते हैं। यह भी पूछा है कि अन्य हॉस्टलों में इस वर्ग के कितने विद्यार्थी रह रहे हैं। यह चिट्ठी मिली है तो पीयू के अधिकारी इसका रास्ता निकालने में जुटे हैं।

पीयू के हर हॉस्टल की क्षमता 300 विद्यार्थियों की
पंजाब यूनिवर्सिटी के हर ब्वॉयज हॉस्टल की क्षमता कम से कम 300 विद्यार्थियों की है। बता दें कि एक हॉस्टल का निर्माण कम से कम 10 करोड़ की लागत से होता है। कई अन्य कार्य करवाने पर यह राशि और बढ़ जाती है। 

सूत्रों का कहना है कि यदि एससी-एसटी के विद्यार्थियों के लिए हॉस्टल बना होगा तो राशि भी इतनी ही मिली होगी। यदि राशि मिली है तो वह कहां गई और हॉस्टल जमीन पर क्यों नहीं है। यदि वाकई में इस वर्ग के विद्यार्थियों के लिए कोई हॉस्टल बना है और विद्यार्थियों को आज तक नहीं बताया गया तो मामला गरमा सकता है। हालांकि इसकी संभावनाएं कम दिख रही हैं। यह भी देखा जा रहा है कि मैप में गलत दर्शा दिया गया हो।

पीयू में हैं साढ़े तीन हजार से अधिक एससी-एसटी विद्यार्थी
केंद्र सरकार ने हाल ही में पीयू को एक पत्र भेजा है। उन्होंने हॉस्टलों में रह रहे एससी-एसटी वर्ग के विद्यार्थियों की जानकारी मांगी है। सूत्रों का कहना है कि यह भी पूछा गया है कि कोई हॉस्टल इस वर्ग के छात्रों के लिए बना है या नहीं। इसके अलावा कुछ अन्य जानकारी भी मांगी गई है। पीयू प्रशासन इसके आंकड़े  जुटाने में लगा हुआ है। मालूम हो कि पीयू में लगभग साढ़े तीन हजार से अधिक एससी-एसटी के विद्यार्थी हर साल शिक्षा ग्रहण करते हैं।
 

पीयू में एससी-एसटी विद्यार्थियों का अलग से कोई हॉस्टल नहीं है। सभी विद्यार्थी एक साथ ही रहते हैं। नक्शे में जो हॉस्टल दर्शाया गया है उसकी सच्चाई का पता लगाया जा रहा है। केंद्र से इस वर्ग के विद्यार्थियों के बारे में जो जानकारी मांगी गई है, जिसका डाटा एकत्र किया जा रहा है। - प्रो. एसके तोमर, डीएसडब्ल्यू, पीयू

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