हॉर्स शो हो या फिर घुड़सवारी की प्रतियोगिता, जीतने के बाद घोड़े और उनके मालिकों की जमकर तारीफ होती है। इन घोड़ों को रेस के लिए तैयार करने और तंदुरुस्त रखने के पीछे बड़ी भूमिका निभाते हैं घोड़ों की देखभाल करने वाले लोग। इन्हें साईस के नाम से जाना जाता है।
अस्तबल के हर घोड़े की कमजोरी और खूबी इन लोगों का पता होती है। इनके हर इशारे और आहट को घोड़े पहचानते हैं। हर मौसम में सुबह से शाम ये लोग घोड़ों के साथ ही रहते हैं। वर्षों के इनके अनुभव का घुड़सवारों के मालिक भी कद्र करते हैं। न्यू चंडीगढ़ के पास इन दिनों हॉर्स शो का आयोजन किया जा रहा है। यहां देश के कई राज्यों से घोड़ों के मालिकों के साथ देखभाल करने साईस भी पहुंचे हुए है। आइए जानते हैं इन लोगों के बारे में-
जीतते घोड़े हैं तो सबसे ज्यादा खुशी महसूस होती है
मूलरूप से राजस्थान के रहने वाले भिवानी सिंह दस सालों से घोड़ों की देखभाल करने का काम कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि हॉर्स शो में जब यह घोड़े जीतते हैं तो सबसे अधिक खुशी उन्हें होती है। उन्होंने बताया कि घोड़े काफी वफादार होते हैं। इनके साथ सारा दिन बिताते हुए इनसे प्यार हो जाता है। इनके लिए दाना पानी का इंतजाम करना, रोजाना सुबह और शाम नहलाना काफी चुनौतीपूर्ण काम रहता है।
पसंदीदा चीजें खिलाने से घोड़े आ जाते हैं काबू में
मूलरूप से झारखंड के रहने वाले सुनील पहले यूपी में घोड़ों की देखभाल का काम करते थे। इसके बाद वह पंजाब पहुंचे और घोड़ों के मालिकों के पास काम करने लगे। उन्होंने बताया कि घोड़े को काबू करना हर किसी के बस की बात नहीं होती। इनसे पहले दोस्ती करनी पड़ती है। इन घोड़ों को उनकी पसंदीदा चीजें खिलानी पड़ती हैं। इसके बाद वह हमसे दोस्ती करते हैं।
पैरों की आहट से पहचान जाते हैं घोड़े
हॉर्स शो में घोड़ों की देखभाल करने वाले मनीष ने बताया कि हमारी सुबह और शाम घोड़ों के साथ होती हैं। मेरे पैरों की आहट से घोड़े मुझे पहचान जाते हैं। सुबह चार बजे उठकर इनके खाने वाले बर्तनों को धोया जाता है। इसके बाद उन्हें पानी और दाना पानी देते हैं। एक घंटा इनके साथ घूमना पड़ता है। इसके बाद इन्हें नहलाया जाता है, इनके बाल बनाए जाते हैं और पैरों की सफाई की जाती है। शाम के समय इन्हें ट्रेंनिंग वाली जगह लेकर जाया जाता है। जहां इन घोड़ों को ट्रेंनिंग दी जाती हैं।