अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। पूर्व मुख्यमंत्री और नेता प्रतिपक्ष भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने धान के निर्यात पर लगाई पाबंदियों को हटाने की मांग दोहराई है। हुड्डा का कहना है कि सरकार द्वारा थोपी गई पाबंदियों के चलते चावल निर्यातकों ने हरियाणा समेत 7 राज्यों में धान की खरीद बंद कर दी है। इसके चलते किसानों को भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है। बासमती के दाम 3500-3600 रुपये प्रति क्विंटल से गिरकर 2500 पर पहुंच गए हैं। किसानों को प्रति क्विंटल कम से कम हजार रुपए का घाटा हो रहा है यानी उसे प्रति एकड़ 20 हजार से ज्यादा की चपत लग रही है।
नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि केंद्र सरकार ने बासमती चावल का न्यूनतम निर्यात मूल्य 1200 डॉलर प्रति टन रखा है, जो बहुत ज्यादा है। भारत सरकार द्वारा लगाई गई पाबंदियों का फायदा पाकिस्तान जैसे देश उठा रहे हैं और चावल का निर्यात कर रहे हैं। इस पाबंदी का हरियाणा के किसानों को सबसे ज्यादा नुकसान हो रहा है। क्योंकि देश से लगभग 45 लाख टन चावल का निर्यात होता है, उसमें से 25 लाख टन अकेले हरियाणा से जाता है। निर्यातकों की हड़ताल के चलते प्रदेश की मंडियों में 1121, 1509, 1781 और सरबती जैसी किस्मों की बिक्री पूरी तरह बंद हो गई है।
भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने आरोप लगाया कि प्रदेश की भाजपा-जजपा सरकार किसानों की इस बर्बादी पर मूक दर्शक बनी हुई है। जबकि प्रदेश के मुख्यमंत्री को तुरंत प्रधानमंत्री से बात करनी चाहिए और केंद्र के सामने किसानों का पक्ष रखना चाहिए। इससे पहले कांग्रेस सरकार के समय जब निर्यात पर रोक लगी थी तो बतौर मुख्यमंत्री हमने तत्कालीन प्रधानमंत्री डॉ़ मनमोहन सिंह से अपील करके रोक को हटवाया था।
उन्होंने कहा कि मोटे धान के किसानों को प्रति क्विंटल 200 से 300 रुपये का घाटा हो रहा है। सरकार को किसानों की समस्या के समाधान के लिए रिलीज ऑर्डर जारी करना चाहिए। ताकि खरीदार अपने आसपास की मंडियों में जाकर भी खरीद कर सकें।
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