हुड्डा और मनोहर हुए आमने सामने, तीखी नोंक-झोंक
कौशल रोजगार निगम की भर्तियों को लेकर नेता प्रतिपक्ष भूपेंद्र हुड्डा सरकार पर हमलावर रहे। उन्होंने निगम की भर्तियों को युवाओं से खिलवाड़ करार दिया। उन्होंने कहा कि इस भर्ती में पीपीपी में दर्ज आय के आधार पर नौकरियां दी जा रही है, जबकि आय की सत्यता क्या है। वह तहसीलदार या आय अधिकारी से सत्यापित नहीं है।
जरूरतमंद लोग बेरोजगार घूम रहे हैं और गलत आय दर्शा कुछ लोग नौकरी पा रहे हैं। दूसरा, निगम में भर्ती होने वाले युवाओं का भविष्य क्या है। न प्रमोशन है, न अधिक वेतन है। हुड्डा ने यह भी आरोप लगाया कि निगम की भर्तियों को कोई क्राइटेरिया सार्वजनिक किया जाता और न ही मैरिट लिस्ट जारी की जाती है।
सरकार पारदर्शिता के केवल दावे कर रही है। बिना परीक्षा और आरक्षण ही नौकरी देना कहां तक ठीक है। पहले ठेकेदार यह काम करते थे, अब सरकार ही ठेकेदार बन गई है। प्रदेश सरकार खाली पड़े 1.80 लाख पदों को पक्की भर्ती के तहत भरे, न की निगम के तहत।
हुड्डा ने नए पोर्टल लाने पर भी सवाल उठाया और कहा कि सारे काम पोर्टल ही करेगा तो फिर सरकार क्या करेगी। हुड्डा ने शेयर पढ़कर मुख्यमंत्री पर निशाना साधा और कहा, हमने देख लिया है आईना में चेहरा आपका, आपके दिल में कुछ और है मुंह पर कुछ और।
मेरी चुनौती किसी विधायक का रिशतेदार नहीं लगा, नहीं चली पर्ची : मनोहर
जवाब में मुख्यमंत्री ने सदन में हुड्डा को चुनौैती देते हुए कहा कि कोई भी ये साबित कर दे कि निगम की पीटीजी-टीजीटी भर्ती में किसी भी विधायक का रिश्तेदार लगा हो। वह गारंटी लेते हैं कि यह भर्ती पारदर्शी हुई है। इस पूरी भर्ती में किसी भी प्रकार की पर्ची नहीं चली। विपक्ष को इसी बात की तकलीफ है कि सिस्टम ठीक क्यों हो रहा है, पहले पर्चियों के हिसाब से नौकरियां मिलती थी। विपक्ष बार-बार कहता है कि हम आएंगे तो पीपीपी खत्म कर देंगे, पोर्टल बंद कर देंगे, मैरिट फाड़ देंगे, लेकिन हमारी सरकार भ्रष्टाचार खत्म करने के लिए और भी पोर्टल लाएगी।
पोर्टल आने से केवल दलाल लोग बेरोजागर हुए हैं। मनोहर ने कहा कि निगम की ओर से अपनाये जा रहे मानदंड को अब वेबसाइट पर डाला जाएगा। एक साल में केवल 20 हजार की सरकारी नौकरियां देना संभव है। पिछले 8 सालों में 1 लाख नौकरियां दी हैं और आने वाले समय में 50 हजार की और भर्ती कर पाएंगे। मुख्यमंत्री ने भी हुड्डा के शेयरों का शायराना अंदाज में जवाब देते हुए कहा, आइना उठाया न करो, उठाओ तो पहले खुद देखा करो। इसी प्रकार, आईना कहीं भी टूटता है तो नाम मेरा ही आता है, क्या मैं पत्थर हूं, जो मुझ पर ईल्जाम लगाया जाता है।