-ढींगरा आयोग को लेकर तीन जजों की अलग-अलग राय को बनाया गया है याचिका में आधार
-राहुल गांधी के बहनोई रॉबर्ट वाड्रा से जुड़ी लैंड डील मामले में सरकार ने गठित किया था आयोग
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। राहुल गांधी के बहनोई रॉबर्ट वाड्रा से कथित तौर पर जुड़े भूमि सौदे के घोटाले की जांच के लिए गठित ढींगरा आयोग की वैधता का मामला फिर से हाईकोर्ट पहुंच गया है। भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने इस मामले में तीन जजों की अलग-अलग राय होने के चलते कोई स्पष्ट आदेश न होने की दलील देते हुए किसी अन्य जज के समक्ष सुनवाई की मांग की है। 9 मई को पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट की खंडपीठ ने ढींगरा आयोग को चुनौती देने वाली याचिका पर हुड्डा को झटका देते हुए आयोग के गठन को सही माना था। हाईकोर्ट ने कहा था कि सरकार ने आयोग को समाप्त नहीं किया था केवल उसके कार्य को समाप्त माना था, ऐसे में आयोग आज भी अस्तित्व में है। सरकार चाहे तो आयोग को जांच आगे बढ़ाने की जिम्मेदारी दे सकती है। हाईकोर्ट ने यह आदेश जारी करते हुए याचिका का निपटारा कर दिया था। हाईकोर्ट की दो जजों की खंडपीठ ने 2019 में आयोग पर अपना फैसला सुनाते हुए अलग-अलग राय दी थी। इसके बाद सुनवाई के लिए नई खंडपीठ गठित की गई थी। नौ मई 2024 को खंडपीठ ने अपना फैसला सुनाते हुए सेक्शन आठ का नोटिस देते हुए आयोग को जांच जारी रखने के लिए वैध करार दिया था। ऐसे में अब जजों की राय कमिशन को लेकर अलग-अलग बताते हुए इस मामले में स्पष्ट निर्णय के लिए सुनवाई की याचिका में मांग की गई है। जस्टिस अनिल खेत्रपाल ने दूसरे जस्टिस अनुपिंदर सिंह ग्रेवाल की राय से स्पष्ट रूप से सहमति व्यक्त की है, हालांकि उसी फैसले में उन्होंने पहले जज अजय कुमार मित्तल द्वारा अपनाए गए इस तर्क का सहारा लेने की राय दी है कि आयोग को जांच आयोग अधिनियम की धारा 8 बी के तहत नोटिस जारी करने के चरण से कार्यवाही शुरू करने की छूट होगी।