मेरे लिए फर्ज सबसे बढ़कर है। कोरोना से न पहले दिन मुझे डर लगा था न आज तक लगा है। यह बात अच्छी तरह मालूम है कि सावधानी और मानकों का पालन ठीक तरह किया जाए तो संक्रमण का कोई खतरा नहीं रहता। जहां तक परिवार और अस्पताल में सामंजस्य की बात है तो कोरोना काल में परिवार और घर से बढ़कर अस्पताल है। अभी वहां मेरी जरूरत ज्यादा है। इसलिए 21 मार्च से लगातार ड्यूटी कर रही हूं।
मेरे अंडर में लगभग 18 स्टाफ काम कर रहे हैं, जिन्हें कोविड प्राइवेट रूम, फ्लू क्लीनिक और अन्य महत्वपूर्ण यूनिटों में लगाया गया है। मैं खुद के साथ उनकी सुरक्षा का पूरा ध्यान रखती हूं। मुझे पता है कि जब तक सेना मजबूत रहेगी तब तक जीत मिलने की उम्मीद की जा सकती है। यह कहना है जीएमएसएच 16 की नर्सिंग सिस्टर कैलाश का, जो दिन-रात की परवाह किए बिना कोरोना के पॉजिटिव मरीजों के बीच लगातार ड्यूटी कर रही हैं।
डबल शिफ्ट में भी की ड्यूटी
सिस्टर कैलाश ने बताया कि कई बार पॉजिटिव मरीजों की ज्यादा संख्या होने पर उन्होंने डबल शिफ्ट में भी ड्यूटी की है। उस दौरान उनकी बेटी और उनके पति ने पूरा साथ दिया। ड्यूटी खत्म कर घर जाने के बाद वह उनके लिए खाना बनाकर रखते हैं। बेटी उनकी हर छोटी-छोटी जरूरतों का ध्यान रखती है। संक्रमण के डर से वह घर पर रहते हुए अपनी बेटी से दूरी बनाए रखी हैं। इसे उनकी बेटी भी बहुत अच्छी तरीके से समझती है। उनका कहना है कि संक्रमण से बचाव का सबसे आसान तरीका सोशल डिस्टेंसिंग को मेंटेन करना है।
जीएमएसएच के पास है अनगिनत योद्धा
जीएमएसएच में सीनियर के साथ ही सहयोगियों की हिम्मत देखकर हमें उत्साह मिलता है। सिस्टर कैलाश का कहना है कि अस्पताल के मेडिकल सुपरिंटेंडेंट से लेकर नर्सिंग इंचार्ज कदम कदम पर मदद को तैयार रहते हैं। ड्यूटी के दौरान कभी किसी तरह की परेशानी होती ही नहीं। कोरोना के मरीजों के पास ड्यूटी करने वाले स्टाफ को लेकर अस्पताल प्रशासन पूरी तरह सजग है। वह हमारी सुरक्षा को लेकर किसी भी स्तर पर चूक नहीं होने देता। यही वजह है कि हम निडर होकर अपनी ड्यूटी कर रहे हैं। सीनियर के सहयोग का ही नतीजा है कि आज जीएमएसएच 16 के पास कोरोना के योद्धाओं की लंबी कतार है।