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यहां स्पेशल बच्चे मंदिरों में चढ़ने वाले फूलों से बनाते हैं खास रंग, देखिए

Tue, 14 Mar 2017 09:29 AM IST
रमेश शुक्ला ‘सफर’/अमर उजाला, अमृतसर(पंजाब)
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अमृतसर के दुर्गियाना मंदिर में खेली गई होली - फोटो : अमर उजाला
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चाह नहीं, मैं सुरबाला के गहनों में गूंथा जाऊं,
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चाह नहीं प्रेमी-माला में बिंध प्यारी को ललचाऊं,
चाह नहीं देवों के सिर पर चढूँ भाग्य पर इठलाऊं,
मुझे तोड़ लेना बनमाली, उस पथ पर देना तुम फेंक!
मातृ-भूमि पर शीश- चढ़ाने, जिस पथ पर जावें वीर अनेक

माखन लाल चतुर्वेदी ने पुष्प अभिलाषा कुछ यूं लिखी है। अमृतसर के आगोश (स्पेशल बच्चे का निशुल्क स्कूल) में करीब 57 बच्चे पुष्प की इस अभिलाषा को पूरा करने के लिए फूलों से कुदरती रंग बनाते हैं। यह फूल श्री हरमंदिर साहिब, श्री दुर्गयाणा मंदिर समेत शहर के बड़े मंदिरों से इकट्ठा करके उन्हें सुखाने के बाद तैयार किया जाता है। खास बात है कि इन फूलों से बनने वाले रंगों के साथ यह स्पेशल बच्चे बार्डर पर तैनात सैनिकों के साथ होली खेलने जाते हैं। 
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अमृतसर के दुर्गियाना मंदिर में खेली गई होली - फोटो : अमर उजाला
यह वह बच्चे हैं, जिन्हें दुनिया से कोई सरोकार नही है। अपनी जिंदगी में खुश रहने वाले यह बच्ते जब होली के दिन गाल में सूखा रंग (केमिकल रहित) लगाकर पानी बचाने का संदेश देते हैं तो हर किसी की आंखें इनके सम्मान में झुक जाती हैं।

इन बच्चों को फूलों से रंग बनाने के लिए स्पेशल ट्रेनिंग देकर इन्हें जहां रोजगार के साथ जोड़ने का काम आगोश करता है। वहीं बच्चों के बनाए रंगों से खुशियों की होली खेलने लोग खरीदने भी आते हैं। पिछले दो सालों से यह संस्था स्पेशल बच्चों के लिए होली के रंग तैयार कर रही है। 

आगोश सेंटर चला रही मनिंदर कौर व उनके पति कंवलजीत सिंह कहते हैं कि केंद्र में कुल 57 बच्चे हैं।  सबसे बड़ा  40 वर्ष का नितिन है। दिलजोत 11 और  सुजल छह साल की है। सबसे कम उम्र की ढाई साल की आरण्या है। सभी बच्चे हर त्यौहार मिलकर मनाते हैं। खुशी है कि रंगों की होली में स्पेशल बच्चे फूलों के रंग बनाकर समाज को केमिकल होली से बचाने का काम करते हैं, जो भी आमदनी होती हैं हम बच्चों में बांट देते हैं। नितिन कहता है कि मुझे होली बहुत अच्छी लगती है, मैं खूब रंग लगाता हूं लेकिन कपड़े खराब नहीं होते।
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