चंडीगढ़ में पांच साल पहले औद्योगिक क्षेत्र-एक में हुई एसिड अटैक की घटनामें सजा काट रहे एक दोषी को रिहा करने से पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने इनकार कर दिया है। हाईकोर्ट के जस्टिस राजन गुप्ता की एकल बेंच ने कहा है कि जेल में लंबे समय से रहने की दलील हरेक मामले में स्वीकार्य नहीं की जा सकती।
एसिड अटैक में जिला अदालत द्वारा दोषी ठहराए गए शाम सिंह नामक युवक ने हाईकोर्ट में रिहाई की मांग को लेकर अर्जी दायर की थी। जिला अदालत की सजा के खिलाफ उसकी अपील पहले से विचाराधीन है। मामले में अर्जी दाखिल कर उसने कहा था कि वह लंबे समय से जेल में है। उसका नाम भी एफआईआर में नहीं था।
दोषी के तौर पर उसकी शिनाख्त भी नहीं हो पाई थी, लिहाजा उसे रिहा किया जाना चाहिए। हाईकोर्ट ने कहा कि जेल में लंबे समय से रहने की दलील मामले के हालात पर निर्भर करती है। एसिड अटैक का मामला गंभीर है, लिहाजा रिहाई से इनकार करते हुए बेंच ने कहा कि उसकी रिहाई का फैसला अपील के फैसले के साथ ही होगा।
मामले के अनुसार नेहा ठाकुर अपनी सहेली निर्मल कौर के साथ 27 नवंबर 2011 की रात करीब नौ बजे फैक्ट्री से छुट्टी के बाद घर जा रही थी। बाइक से उसका पीछा कर रहे दो युवकों ने नेहा और निर्मल के पास आकर गति धीमी की। साथ ही बाइक के पीछे बैठे युवक ने दोनों पर तेजाब फेंका।
घटना पर नेहा बुरी तरह झुलस गईं। निर्मल के दोनों हाथों और शरीर के ऊपरी हिस्से में गंभीर जख्म आए थे। नेहा को सेक्टर-32 अस्पताल में भर्ती कराया गया था। मामले में जिला अदालत ने शाम सिंह और एक अन्य युवक को सजा सुनाई थी। इस सजा को हाईकोर्ट में चुनौती दी गई थी।
इसी मामले में अर्जी दाखिल करके शाम सिंह ने उपरोक्त दलील देते हुए रिहाई की मांग की। उधर यूटी के वकील ने कहा था कि तफ्तीश और शिनाख्त के बाद ही शाम सिंह को सजा सुनाई गई थी। यूटी की दलील पर भरोसा जताते हुए हाईकोर्ट ने शाम सिंह की रिहाई की मांग नामंजूर कर दी है।