बीए एलएलबी के छठे सेमेस्टर के पेपर में छात्र को फेल घोषित करने पर पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने पंजाब यूनिवर्सिटी (पीयू) चंडीगढ़ पर एक लाख रुपये का जुर्माना लगाया है। हाईकोर्ट ने पीयू को आदेश दिया कि यह राशि छात्र को दी जाए और बाद में दोषी अधिकारियों से वसूल की जाए। हाईकोर्ट ने पीयू वीसी को इस मामले पर दो महीने में सुधारात्मक उपाय करने का भी निर्देश दिया।
चंडीगढ़ निवासी छात्र रोहन राणा ने याचिका दाखिल करते हुए दिसंबर 2023 में घोषित किए गए भूमि कानून और किराया कानून पेपर के परिणाम को चुनौती दी थी। मई 2019 में जब परीक्षा ली गई थी तब वह इस पेपर में फेल हो गया था। इसके लिए उसने मई 2023 में दोबारा परीक्षा दी थी। जब छात्र ने 2016-17 के शैक्षणिक सत्र में प्रवेश लिया था तो 60:40 अंकों का मानदंड लागू था। थ्योरी पेपर के लिए 60 और आंतरिक मूल्यांकन के लिए 40 अंकों का प्रावधान था।
बाद में नियमों में संशोधन किया गया और थ्योरी पेपर और आंतरिक मूल्यांकन का अनुपात 60:40 से बदलकर 80:20 कर दिया गया। एक छात्र को आंतरिक मूल्यांकन और थ्योरी पेपर में संयुक्त रूप से 45 प्रतिशत अंक प्राप्त करने की आवश्यकता थी। जब छात्र ने मई 2023 में परीक्षा दी तो उसे अधिकतम 80 अंकों वाला पेपर दिया गया। उसने 54 अंक प्राप्त किए और इस तरह वह सफल हो गया लेकिन विश्वविद्यालय ने छात्र के अंकों को 80 में से 54 से घटाकर 60 में से 41 करने की प्रक्रिया अपनाई। इस तरह उसे फेल घोषित कर दिया गया।
परिणाम रद्द कर छात्र को डिग्री देने का आदेश दिया
सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने विश्वविद्यालय के निर्णय पर सवाल उठाया और पूछा कि क्या ऐसा कोई निर्देश या कानूनी प्रावधान है जिसके तहत स्केलिंग की गई। कोर्ट को बताया गया कि यह एक पुरानी प्रथा है लेकिन विश्वविद्यालय के पास कोई निर्देश या कानूनी प्रावधान नहीं है। कोर्ट ने तर्क को विकृत और बिल्कुल भी टिकने योग्य नहीं पाया। जब किसी छात्र को अधिकतम 80 अंकों वाले परीक्षा पत्र दिए जाते हैं और वह 54 अंक प्राप्त कर परीक्षा उत्तीर्ण करता है तो यदि विश्वविद्यालय को आनुपातिक आधार पर अंकों को कम करने की आवश्यकता होती है तो ऐसा किसी भी कानून के तहत निर्धारित किसी भी सूत्र को अपनाकर किया जाना चाहिए। कोर्ट ने कहा कि यह निर्णय सनक और कल्पना पर आधारित था जिसका छात्र के कॅरिअर पर प्रभाव पड़ा। यह न केवल अवैध और विकृत था न्यायालय द्वारा इसकी निंदा भी की गई। इसके साथ ही कोर्ट ने परिणाम को रद्द कर दिया और विश्वविद्यालय को छात्र को डिग्री देने की प्रक्रिया शुरू करने का आदेश दिया।