करारनामे के मुताबिक कोई आर्डर पूरा नहीं किए जाने को धोखाधड़ी नहीं माना जा सकता। यह व्यवस्था पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने चंडीगढ़ के होटल पिकाडली और गुड़गांव की कंपनी के बीच चल रहे केस का फैसला सुनाते हुए दी।
पिकाडली होटल की ओर से गुड़गांव की कंपनी के खिलाफ करारनामे के मुताबिक ऑर्डर पूरा नहीं करने पर धोखाधड़ी और अमानत में ख्यानत के आरोप तहत दर्ज एफआईआर को रद्द करते हुए जस्टिस अनीता चौधरी ने फैसले में कहा कि करारनामा टूटने को धोखाधड़ी नहीं माना जा सकता। पुलिस को भी अदालत में दोषपत्र दाखिल करने से पहले मामले की गहराई तक जाना चाहिए था।
गुड़गांव की कंपनी के एमडी और डायरेक्टर को बनाया था आरोपी
मामले के अनुसार, पिकाडली होटल को अपने लुधियाना स्थित एक प्रोजेक्ट के लिए कुछ सामान की जरूरत थी। वर्ष 2012 में गुड़गांव की कोल्हर इंडिया कारपोरेशन कंपनी से इसके लिए 46 लाख रुपए का करार हुआ था।
कंपनी ने सामान भेजना शुरू कर दिया, लेकिन इसकी फिटिंग में कुछ खराबी आ गई। होटल ने कंपनी से बातचीत की तो कंपनी ने अमेरिका की उस कंपनी से सामान बदलने को कहा, जिससे वह सामान मंगवा रही थी।
इस बीच होटल की शिकायत पर कंपनी के एमडी सलिल सदानंदन और एक डायरेक्टर के खिलाफ गुड़गांव में धोखाधड़ी एवं अमानत में ख्यानत का मामला दर्ज कर लिया गया। सदानंदन को इस मामले में पहले जमानत मिल चुकी थी और उन्होंने एडवोकेट सुमित गोयल के माध्यम से एफआईआर रद्द करने के लिए हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी।
पिकाडली होटल ने दर्ज कराई थी एफआईआर
याचिकाकर्ता के वकील ने दलील दी कि सामान समय पर सप्लाई किया जाता रहा। जैसे ही दिक्कत आई, इसकी रिप्लेस्मेंट के प्रयास शुरू किए गए, लेकिन पुलिस ने शिकायत पर एक ही दिन में मामला दर्ज कर लिया। पुलिस जब पूछताछ के लिए पहुंची, उस वक्त याचिकाकर्ता यात्रा पर था। करार पूरा करने का प्रयास किया गया, लेकिन किसी प्रकार की धोखाधड़ी नहीं की गई।
कोर्ट को यह भी बताया गया कि एफआईआर दर्ज होने के बाद भी सामान सप्लाई किया जाता रहा। दूसरी ओर पिकाडली होटल ने कहा कि कंपनी अपने स्तर पर सामान सप्लाई करने की बात कर रही है, लेकिन इसकी जानकारी होटल को नहीं है। पुलिस ने कहा कि इस मामले में जिला अदालत में दोषपत्र दाखिल किए जा चुके हैं।