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हाईकोर्ट का 25 साल बाद फैसला: अमृतसर शहर से 31 दिसंबर तक हटेंगी डेयरियां, निगम ने शुरू की कार्रवाई

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अमृतसर। शहर की चारदीवारी के भीतर चल रही डेयरियों को 31 दिसंबर तक हटाने का हाईकोर्ट आदेश नगर निगम के लिए बड़ी चुनौती बन गया है। वर्ष 2000 में डेयरी वेलफेयर यूनियन की ओर से दायर याचिका का 25 साल बाद मुख्य न्यायाधीश शील नागू और न्यायमूर्ति संजीव बेरी की खंडपीठ ने निपटारा करते हुए निगम को आदेश दिया कि डेयरियों के मालिकों को नोटिस जारी किया जाए और उन्हें खाली पड़े पुनर्वास प्लाट पारदर्शी तरीके से आवंटित किए जाएं।
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नगर निगम ने आदेशानुसार नोटिस जारी करना शुरू कर दिया है। निगम की एस्टेट टीम और सेहत विभाग के अधिकारी डेयरी मालिकों को तीन दिन में जवाब देने के लिए कह रहे हैं। निगम के सेहत अफसर डॉ. किरण कुमार ने कहा कि हाईकोर्ट का आदेश लागू करना प्राथमिकता है, लेकिन डेयरी मालिकों के साथ किसी भी प्रकार की कठोर कार्रवाई नहीं की जाएगी। शहर के पांच विधानसभा हलकों में अब भी डेयरियां संचालित हो रही हैं। चार साल पहले निगम द्वारा कराए गए सर्वे में शहर की 368 डेयरियों की पहचान की गई थी। अधिकांश गैर पंजीकृत डेयरियां खुले में गोबर व अन्य वेस्ट का निपटान कर रही थीं।

हजारों पशुओं को कहां ले जाएं: डेयरी यूनियन
डेयरी यूनियन के वरिंदर सिंह ने कहा कि नोटिस जारी किए जाने के बावजूद पहले यह स्पष्ट किया जाए कि उनके हजारों पशुओं को कहां ले जाया जाएगा। उन्होंने निगम से डेयरी प्लाजा बनाने की मांग की, ताकि रोजगार और आर्थिक सुरक्षा पर कोई संकट न आए। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर निगम या सरकार दबाव बनाकर कार्रवाई करेगी, तो राज्यभर के डेयरी मालिक और किसान संगठन संघर्ष के लिए पीछे नहीं हटेंगे। हाईकोर्ट का यह निर्णय शहर में डेयरी संचालन, पर्यावरण सुरक्षा और नागरिक स्वास्थ्य के दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
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