चंडीगढ़। रिश्वत लेने के मामले में आरोपी पूर्व एसडीएम शिल्पी पात्रा के खिलाफ अदालत में ट्रायल चलेगा या नहीं, इसका फैसला अब हाईकोर्ट में होगा। मंगलवार को सीबीआई की विशेष अदालत ने शिल्पी पात्रा से जुड़े मामले के सभी दस्तावेज पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल को भेज दिए हैं। रजिस्ट्रार जनरल के जरिए यह दस्तावेज हाईकोर्ट की उस अदालत तक जाएंगे, जिस अदालत ने शिल्पी पात्रा के मामले में स्टे लगा रखी है। दस्तावेजों को पढ़ने के बाद ही हाईकोर्ट दिशा-निर्देश जारी करेगा कि इस मामले में सुनवाई होगी या नहीं। निचली अदालत इस पर कोई निर्णय नहीं ले सकती।
दरअसल कुछ महीने पहले सुप्रीम कोर्ट का एक फैसला आया था, जिसमें कहा गया था कि जिन मामलों में किसी भी अदालत ने स्टे लगाई हुई है, वह 6 महीने के बाद अपने आप खत्म हो जाएगी। यदि स्टे को आगे बढ़ाना है तो उसके लिए सही कारण उपलब्ध होने चाहिए। सुप्रीम कोर्ट ने निर्देश दिया था कि इस फैसले को पूरे देश की अदालतों में लागू की जाए। इस फैसले के आने के बाद सीबीआई ने अदालत में आवेदन दायर कर मामले में ट्रायल शुरू करने की मंजूरी मांगी थी। इस मामले में स्टे लगे हुए 6 महीने से ज्यादा हो चुका है इसलिए पहली स्टे खत्म हो चुकी है। अब सीबीआई की विशेष अदालत ने मामले की फाइल हाईकोर्ट को भेज दी है ताकि ट्रायल को शुरू किया जा सके और शिकायतकर्ता को न्याय मिल सके।
यह है मामला
आरोप के मुताबिक, करीब तीन साल पहले नगर निगम की पूर्व ज्वाइंट कमिश्नर व एचसीएस ऑफिसर शिल्पी पात्रा ने सील किए गए सेक्टर-26 के एक शोरूम को खोलने की एवज में पांच लाख रुपये की रिश्वत मांगी थी। सौदा दो लाख में तय हुआ। इसमें से 50 हजार रुपये पांच अगस्त साल 2017 को दिए जाने थे। इस बात की जानकारी सीबीआई के पास पहुंच गई। सीबीआई ने जाल बिछाकर शिल्पी पात्रा, उसके पति धीरज दत्त और बिचौलिया जीएम बराड़ को गिरफ्तार किया था। सीबीआई ने बिचौलिए के घर से 25 हजार रुपये, गहने और संपत्ति से जुड़े कुछ कागजात भी बरामद किए थे। इस मामले की सुनवाई चंडीगढ़ की विशेष अदालत में चल रही थी लेकिन इस बीच शिल्पी पात्रा हाईकोर्ट चली गई और ट्रायल रुकवाने के लिए स्टे ले आई। उसके बाद इस मामले की सुनवाई बंद चल रही है।
फैसले के बाद दायर हुए आवेदन
सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद सीबीआई ने कई मामलों में आवेदन दायर कर ट्रायल दोबारा चलाने की मंजूरी मांगी है। चंडीगढ़ की सीबीआई अदालत में रिश्वत के लगभग 9 मामले ऐसे हैं, जिन पर स्टे लगी हुई है। स्टे के कारण मामलों का ट्रायल शुरू नहीं हो पा रहा है। सभी मामलों पर हाईकोर्ट से स्टे लगी हुई है। सुप्रीम कोर्ट की इस जजमेंट के आने के बाद काफी रुके पड़े मामलों पर जल्दी सुनवाई शुरू हो सकती है।