याची के वकील बिनत शर्मा ने हाईकोर्ट को बताया कि गड़रिया जनजाति के खानाबदोश लोग हैं और सदियों से इसी जीवन शैली में रह रहे हैं। वे भेड़ के उत्पाद बेचकर अपनी आजीविका कमाते हैं। कोर्ट को बताया गया कि भेड़ एक ऐसा जानवर है, जिसे कैद में नहीं पाला जा सकता और यह चरकर जीवित रह सकता है।
पंजाब में नदी के किनारे के परिदृश्य इसके लिए बहुत उपयुक्त हैं और यही कारण है कि याचिकाकर्ताओं ने अपना पूरा वर्ष पंजाब में अपनी भेड़ों को चराने में बिताया। याची ने बताया कि 13 अक्तूबर 2021 को पहली बार याचिकाकर्ताओं के कुछ सदस्य जो अपनी भेड़ों के झुंड के साथ आराम कर रहे थे, इस दौरान उन्हें कुछ गिरोह के सदस्यों ने घेर लिया और उन्हें घायल करने के बाद 40-50 विकसित भेड़ों को अपने साथ ले गए।
एक स्वस्थ भेड़ की कीमत लगभग 20-25 हजार होती है। इस तरह एक ही घटना में उन्हें करीब 10 लाख रुपये का नुकसान हुआ। नवांशहर पुलिस ने मामले में एफआईआर दर्ज करने के अलावा कुछ नहीं किया।