-जातीय सफाए की कवायद की आशंका जताते हुए हाईकोर्ट ने लिया था संज्ञान
-सुप्रीम कोर्ट के बुलडोजर को लेकर अंतरिम आदेश का दिया गया है हवाला
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। नूंह में हुई हिंसा के बाद सैकड़ों निर्माण पर की गई कार्रवाई को संभवत: जातीय सफाए बताते हुए मामले में लिए गए संज्ञान का मंगलवार को हाईकोर्ट ने निपटारा कर दिया। हाईकोर्ट ने कहा कि सुप्रीमकोर्ट 17 सितंंबर 2024 को आदेश जारी कर चुका है कि उनके आदेश के बिना बुलडोजर कार्रवाई नहीं होगी, ऐसे में अब इस याचिका का कोई औचित्य नहीं है।
हाईकोर्ट के जस्टिस जीएस संधावालिया व जस्टिस हरप्रीत कौर जीवन पर आधारित बेंच ने नूंह में हुई हिंसा के बाद इमारतों पर बुलडोजर कार्रवाई पर अगस्त 2023 को संज्ञान लिया था। हाईकोर्ट ने निर्माण गिराने पर रोक लगाते हुए तोड़े गए निर्माणों की जानकारी तलब करते हुए हरियाणा सरकार से पूछा था कि क्या तय कानूनी प्रक्रिया के तहत यह कार्रवाई की जा रही है। कोर्ट ने कहा था कि ऐसी परिस्थितियों में, हम राज्य को नोटिस जारी करने के लिए बाध्य हैं क्योंकि यह हमारे संज्ञान में आया है कि हरियाणा राज्य अनावश्यक बल का प्रयोग कर रहा है। कोर्ट ने कहा था कि कहीं कानून-व्यवस्था की समस्या की आड़ में किसी विशेष समुदाय की इमारतों को तो नहीं गिराया जा रहा है और क्या यह राज्य द्वारा जातीय सफाए की कवायद तो नहीं है।