कोताही मिली तो अधिकारियों की संपत्ति की जांच करवाई जाएगी
कोर्ट ने कहा कि अगर हमने पाया कि इन मामलों की जांच में कोताही बरती गई है तो सभी मामलों की जांच सीबीआई को सौंपी जा सकती है। साथ ही जांच अधिकारियों की संपत्ति की जांच करवाई जाएगी और ईडी को भी जांच में शामिल करने का आदेश दिया जा सकता है। अवैध खनन केवल रोपड़ तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरे राज्य में फैला है।
अभी सबसे पहले रोपड़ का नंबर आया है और इसके बाद बाकी के जिलों का भी आएगा। कोर्ट ने कहा कि वह अधिकारियों को एक मौका देना चाहते हैं कि वह अपनी गलती सुधारें। अवैध खनन के मामलों में जांच गरीबों तक ही सीमित न रहे, जमीन के मालिक व खनन माफियाओं पर शिकंजा कसा जाए।
गरीब लोगों को बलि का बकरा बनाने पर लिया संज्ञान
रोपड़ के नंगल पुलिस स्टेशन में अवैध खनन को लेकर 27 जुलाई को एफआईआर दर्ज की गई थी। इस मामले में एक टिप्पर चालक को जमानत देते हुए हाईकोर्ट ने अवैध खनन में केवल गरीब लोगों को बलि का बकरा बनाने पर संज्ञान लिया था। कोर्ट ने कहा था कि पुलिस असली दोषियों को बचाने की कोशिश कर रही है।
गुरुवार को हाईकोर्ट ने एसएसपी, नंगल के तहसीलदार, माइनिंग और ड्रेनेज विभाग के एक्सईएन को तलब कर शुक्रवार को पेश होने का आदेश दिया था। कोर्ट ने पंजाब पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते कहा कि ऐसा प्रतीत होता है कि पुलिस खनन माफिया से मिलकर काम कर रही है। केवल गरीब लोग निशाना बनाए जाते हैं और खनन माफिया पुलिस के शिकंजे से दूर है।