-अवमानना के मामलों में अपील लंबित रहते रोक लगेगी तो न्यायालय पर बढ़ेगा बोझ
-एक अवमानना याचिका पर सुनवाई के दौरान बेंच ने कानून को लेकर स्थिति स्पष्ट की
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने यह स्पष्ट कर दिया है कि सिंगल बेंच के आदेश के खिलाफ सुनवाई करते हुए खंडपीठ अवमानना अदालत के समक्ष कार्यवाही पर रोक लगाने का अधिकार नहीं रखती है। खंडपीठ के पास सीमित शक्ति होती है और उन्हें वह सिंगल बेंच द्वारा की गई गलती को सुधार अपना फैसला सुना सुनाना होता है। हाईकोर्ट ने अवमानना को लेकर कानून स्पष्ट करते हुए यह अहम आदेश जारी किया है।
हाईकोर्ट के समक्ष एक अवमानना याचिका सुनवाई के लिए पहुंची थी जिसमें बताया गया था कि सिंगल बेंच के जिस आदेश की अवमानना को लेकर सुनवाई हो रही है उस मामले में अपील लंबित है। ऐसे में अवमानना याचिका पर सुनवाई न की जाए, सिंगल बेंच के आदेश पर खंडपीठ रोक लगा चुकी है। जस्टिस राजबीर सहरावत ने कहा कि खंडपीठ के पास सिंगल बेंच के आदेश के खिलाफ सुनवाई करते समय अवमानना न्यायालय को आगे बढऩे से रोकने का अधिकार नहीं है। यदि ऐसी रोक लगाई जाती है तो आदेशों की अवहेलना होगी और न्यायालय पर बोझ बढ़ेगा। सर्वोच्च न्यायालय ने रोमा सोनकर बनाम मध्य प्रदेश लोक सेवा आयोग और अन्य मामले में यह स्पष्ट कर दिया था कि सिंगल बेंच खंडपीठ की अधीनस्थ न्यायालय नहीं है। ऐसे में खंडपीठ के पास उन मामलों या पहलुओं में अलग आदेश पारित करने का अधिकार नहीं है जिनको उनके सामने चुनौती ही नहीं दी गई। अवमानना न्यायालय के पास न्यायालय की अवमानना अधिनियम और भारतीय संविधान के तहत अधिक व्यापक अधिकार और शक्तियां हैं।