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दुर्घटना पीड़ितों व आश्रितों को मुआवजे के लिए लंबा इंतजार, हम व्यथित : हाईकोर्ट

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-कंपनी का वकील पेश न हुआ तो पैनल के वकील को सौंप देंगे जिम्मेदारी, कंपनी करे भुगतान
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-18 साल पुराने मामले में वकील के पेश न होने पर हाईकोर्ट ने अन्य वकील को सौंपी जिम्मेदारी

अमर उजाला ब्यूरो

चंडीगढ़। पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने मोटर दुर्घटना दावा न्यायाधिकरण (एमएसीटी) के लंबित मामलों पर व्यथा व्यक्त करते हुए कहा है कि पीड़ितों और आश्रितों को मुकदमे में देरी के चलते मुआवजे के लिए इंतजार करना पड़ता है। ऐसे में अब वकील की गैरमौजूदगी में पैनल पर मौजूद अन्य वकील को न्यायालय जिम्मेदारी सौंप देगा, बीमा कंपनी को इसके लिए भुगतान करना होगा।
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जस्टिस सुदीप्ति शर्मा ने कहा कि यह न्यायालय यह देखकर व्यथित है कि मोटर वाहन दुर्घटना से संबंधित वर्ष 2006-07 के इन मामलों में वकील के पेश न होने के कारण काफी देर हुई है। न्यायालय के संज्ञान में अक्सर यह बात आई है कि न्यायालय के विशिष्ट आदेशों के बावजूद बीमा कंपनियों के वकील पेश होने में विफल रहते हैं जबकि इन मामलों का शीघ्र निर्णय जरूरी है। न्यायाधीश ने कहा कि इससे पहले, कुछ मामलों में न्यायालय ने स्पष्ट कर दिया था कि पुराने मामलों में स्थगन नहीं दिया जाएगा। न्यायालय ने कहा कि इन असाधारण परिस्थितियों के मद्देनजर, यह न्यायालय सभी बीमा कंपनियों और इस न्यायालय के समक्ष उपस्थित होने वाले उनके पैनलबद्ध वकीलों को सूचित करना आवश्यक समझता है कि यदि उनका कोई भी नियुक्त वकील उपस्थित होने में विफल रहता है, तो न्यायालय बीमा कंपनियों के साथ पैनलबद्ध वकील से सहायता का अनुरोध करेगा, जो आमतौर पर मामले में सहायता के लिए न्यायालय में उपस्थित होते हैं। इसके बाद, रिकॉर्ड का अवलोकन करने के बाद मामले का उसके गुण-दोष के आधार पर निर्णय लिया जाएगा। इस प्रकार हाईकोर्ट ने बीमा कंपनियों को संबंधित मामलों के लिए न्यायालय द्वारा नियुक्त वकील को वर्तमान निर्धारित शुल्क वितरित करने का निर्देश दिया। यह घटनाक्रम तब हुआ जब न्यायालय ने पाया कि सोनीपत के 2007 के एक पुराने बीमा दावे के मामले में बीमा कंपनी की ओर से कोई भी उपस्थित नहीं था। उपरोक्त के मद्देनजर, न्यायालय ने रजिस्ट्री को इस आदेश की प्रतियां सभी बीमा कंपनियों को लंबित एमएसीटी मामलों के बारे में सूचित करने के लिए अग्रेषित करने का निर्देश दिया।
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