-जो निर्माण वैध किए गए हैं, वह इस याचिका पर आने वाले फैसले पर होंगे निर्भर
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। हरियाणा सरकार द्वारा अवैध निर्माणों को वैध करने के लिए बनाई गई पॉलिसी को चुनौती देने वाली जनहित याचिका पर पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने हरियाणा सरकार से जवाब तलब कर लिया है। साथ ही यह भी स्पष्ट किया है कि जो भी निर्माण वैध होंगे, वह इस याचिका पर आने वाले फैसले पर निर्भर होंगे।
जनहित याचिका दाखिल करते हुए कृष्ण लाल गेरा ने हाईकोर्ट को फरीदाबाद के हाल के बारे में बताया। याची ने कहा कि लोगों ने अवैध तरीके से निर्माण करते हुए पब्लिक लैंड पर ही कब्जा किया हुआ है। निर्माण करते हुए न तो बिल्डिंग बाय लॉज का ध्यान रखा जाता है और न ही पार्किंग पॉलिसी। इसके खिलाफ हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट भी समय-समय पर आदेश जारी करते आए हैं। इस सब के बावजूद सरकार ने 26 जून 2018 को एक नोटिफिकेशन जारी कर अवैध निर्माणों को वैध करने की घोषणा कर दी। इसके लिए फीस निर्धारित की गई है। याची ने कहा कि ऐसा करना न केवल गलत है बल्कि म्यूनिसिपल एक्ट के भी खिलाफ है। याची ने कहा कि हरियाणा सरकार की इस नोटिफिकेशन को खारिज किया जाना चाहिए और अवैध निर्माण करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए। याची ने कहा कि अधिकारी लैंड माफिया को फायदा देने के लिए यह पॉलिसी लेकर आए हैं इसलिए इस पॉलिसी पर तत्काल रोक लगाई जानी चाहिए। हाईकोर्ट ने अब इस नीति को लेकर हरियाणा सरकार को पक्ष रखने का आदेश दिया है। साथ ही यह भी स्पष्ट किया कि वैध किए गए निर्माण इस याचिका पर आने वाले फैसले पर निर्भर होंगे।