हाईकोर्ट ने कहा कि उनकी मांग मानी जा सकती है और इसके लिए उच्चस्तरीय जांच कमेटी भी गठित करने को हम तैयार हैं। कमेटी के सदस्य भी प्रदर्शनकारी ही तय करें लेकिन उसके लिए फैक्टरी के बाहर से धरना हटाना जरूरी है। अगर फैक्टरी बंद रही तो कैसे इसकी जांच की जा सकती है।
याचिकाकर्ता कंपनी मालब्रोस ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर बताया था कि उनकी यूनिट के बाहर प्रदर्शनकारी बैठ गए हैं और इसे बंद कर दिया गया है। उनकी यूनिट पर पर्यावरण मानकों के उल्लंघन का आरोप है। पंजाब प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड जांच करने के बाद उन्हें आगे काम करने की स्वीकृति दे चुका है। इसके बाद प्रदर्शनकारियों ने इस यूनिट की एनजीटी की मॉनिटरिंग कमेटी से जांच की मांग की थी। एनजीटी की मॉनिटरिंग कमेटी की जांच में भी सब ठीक पाया गया।
फैक्टरी को हुए नुकसान की एवज में सरकार 20 करोड़ करवा चुकी है जमा
फैक्टरी के बाहर धरने को खत्म करवाने में विफल रहने के कारण हाईकोर्ट ने कंपनी के नुकसान की भरपाई के लिए 20 करोड़ रुपये हाईकोर्ट की रजिस्ट्री में जमा करवाने का पंजाब सरकार को आदेश दिया था। कंपनी ने कोर्ट को बताया था कि इस यूनिट को लगाने में 300 करोड़ रुपये निवेश किए गए हैं, 200 करोड़ बाजार से उठाए गए थे। फैक्टरी को चलाने और स्टाफ के वेतन पर डेढ़ करोड़ का खर्च है और दो करोड़ रुपये प्रतिमाह किस्त देनी पड़ती है। सरकार प्रदर्शनकारियों से मिली हुई है और ऐसे में उनका हर महीने करोड़ों का नुकसान हो रहा है।