पंजाब में ड्राइविंग लाइसेंस और वाहनों के रजिस्ट्रेशन की स्मार्ट चिप लगाने वाली कंपनी का ठेका रद्द करने के पंजाब सरकार के फैसले के आदेश पर रोक लगा दी है। इसके साथ ही हाईकोर्ट ने सरकार को कॉन्ट्रैक्ट की शर्तों के तहत आगे कार्रवाई किए जाने के आदेश दिए हैं।
हाईकोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि सरकार ने जिस तरह से यह कॉन्ट्रैक्ट रद्द किया है, वह न केवल अवैध है बल्कि गैर कानूनी भी है। कॉन्ट्रैक्ट को 5 वर्ष के लिए बढ़ाए जाने के बाद रेट्स तय करने के लिए जिस दिन बैठक बुलाई थी, उसी दिन रद्द कर दिया गया।
स्मार्ट चिप प्राइवेट लिमिटेड ने सीनियर एडवोकेट पुनीत बाली के जरिए हाईकोर्ट में दायर याचिका में बताया है कि वह राज्य में ड्राइविंग लाइसेंस और वाहनों के रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट में स्मार्ट चिप लगाने का काम कर रहे है। जून 2015 में उसका कॉन्ट्रैक्ट 5 वर्षों के लिए और बढ़ा दिया गया था।
इसी वर्ष 1 जून को उसको नए सिरे से स्मार्ट चिप लगाने के रेट्स तय किए जाने के लिए बुलाया गया था। लेकिन उसी दिन 1 जून को एक और आदेश जारी करते हुए कॉन्ट्रैक्ट एक्सटेंशन करने के आदेश को रद्द कर दिया गया। याचिकाकर्ता कंपनी ने कहा कि उसे मार्च से जुलाई 2016 तक के इन महीनों की पेमेंट्स ही नहीं जारी की गई।
उसके बाद अगस्त 2017 से जनवरी 2018 तक की पेमेंट की गई और अब जिस दिन कॉन्ट्रैक्ट खत्म कर दिया गया उस दिन तक की भी पेमेंट्स नहीं की गई है। जबकि कॉन्ट्रैक्ट की शर्तों के अनुसार अगर कॉन्ट्रैक्ट रद्द किया जाता है कि तो उसके रद्द किये जाने के दिन तक की कंपनी को पेमेंट की जानी चाहिए थी।
सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने पंजाब सरकार को फटकार लगाते हुए कहा कि कैसे उसी दिन कंपनी का कॉन्ट्रैक्ट रद्द किया जा सकता है, जिस दिन उसके साथ रेट फाइनल किये जाने थे। यह पूरी तरह से गैर-कानूनी है। हाईकोर्ट ने कहा इस पर आगे सुनवाई की जाएगी। लिहाजा हाईकोर्ट ने विभाग द्वारा कंपनी का कॉन्ट्रेक्ट रद्द करने के आदेश पर रोक लगाते हुए सरकार को रेट्स तय करने के आदेश दिया है ।