चंडीगढ़। साल 2009 में दिए गए आदेश के बावजूद आज तक पंचकूला सेक्टर-19 के विस्थापित डेयरी मालिकों को वैकल्पिक साइटें आवंटित नहीं करने पर पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने सरकार को फटकार लगाते हुए शहरी स्थानीय निकाय विभाग के आयुक्त व सचिव विकास गुप्ता को तलब कर लिया है।
यह मामला 2007 में दायर याचिका से जुड़ा है। इसमें बताया गया था कि पंचकूला सेक्टर-पांच के विकास के लिए गांवों की जमीन अधिगृहीत की गई। प्रभावित लोगों को सेक्टर-19 में प्लाट दिए गए। इनमें से कई लोगों ने अपने मकानों से ही डेयरी और छोटे-छोटे व्यवसाय चलाने शुरू कर दिए। जब प्रशासन ने इस आधार पर कार्रवाई शुरू की कि आवासीय क्षेत्र का दुरुपयोग हो रहा है तो हाईकोर्ट ने 29 अप्रैल 2009 को आदेश पारित कर तत्काल कमेटी बैठक बुलाने और डेयरी मालिकों के लिए वैकल्पिक साइट चिह्नित करने का निर्देश दिया था लेकिन अदालत के आदेश पर अमल नहीं हुआ। हाल ही में क्षेत्र निवासी प्यारे लाल ने अवमानना याचिका दाखिल कर कहा कि 16 साल बाद भी सरकार और प्रशासन ने कोई ठोस कदम नहीं उठाया है। हाईकोर्ट को यह भी बताया गया कि जनवरी 2024 में दायर अवमानना याचिका सुनवाई के दौरान अधिकारियों ने आश्वासन दिया था कि जमीन चिह्नित कर दी गई है और केवल विकास कार्य बाकी है। उस आधार पर अदालत ने मामला निपटाया, मगर आज तक कोई प्रगति नहीं हुई। प्यारे लाल ने दलील दी कि यह रवैया मनमाना और गैरकानूनी है इसलिए संबंधित अधिकारियों के खिलाफ अदालत की अवमानना की कार्रवाई हो और 2009 के आदेश पर तुरंत अमल करवाया जाए। अदालत ने अधिकारियों को तीन सप्ताह की अंतिम मोहलत देते हुए साफ किया कि अब और देरी बर्दाश्त नहीं की जाएगी अन्यथा कठोर कार्रवाई की जाएगी।
अदालत ने गुप्ता की ओर से दायर नवीनतम हलफनामे को खारिज कर दिया जिसमें वर्ष 2026 तक कार्रवाई पूरी करने का एक और नया एक्शन प्लान प्रस्तुत किया गया था। अदालत ने सख्त शब्दों में कहा कि 2009 से लेकर अब तक यानी पूरे 16 वर्ष बीत गए हैं मगर आदेश का पालन नहीं हुआ है। अब 2026 तक टालने की बात कही जा रही है, जो स्वीकार्य नहीं।