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Chandigarh: पीजीआई की अनुबंध कर्मचारी यूनियनों को झटका, सात फरवरी की हड़ताल पर हाईकोर्ट ने लगाई रोक

Tue, 06 Feb 2024 09:46 AM IST
निवेदिता वर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़

सार

केंद्र ने दिसंबर 2014 को पीजीआई को अनुबंध कर्मियों की व्यवस्था को समाप्त करने का आदेश दिया था। संस्थान को इस मामले में अंतरिम तौर पर मोहलत मिली हुई है। तब से अनुबंध कर्मचारी सेवा नियमित करने की मांग कर रहे हैं और हड़ताल की चेतावनी दे चुके हैं। हालांकि हाईकोर्ट यह स्पष्ट कर चुका है कि यूनियन पीजीआई की व्यवस्था में बाधा नहीं बनेंगी। 
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पीजीआई चंडीगढ़ - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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पीजीआई चंडीगढ़ के अनुबंध कर्मियों की विभिन्न यूनियन को बड़ा झटका देते हुए पंजाब हरियाणा हाईकोर्ट ने उनकी ओर से 7 फरवरी को प्रस्तावित हड़ताल पर रोक लगा दी है। इसके साथ ही अनुबंध कर्मियों की ज्वाइंट एक्शन कमेटी के चेयरमैन के पीजीआई में प्रवेश पर अगले आदेश तक प्रतिबंध लगा दिया है। 

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हाईकोर्ट ने चंडीगढ़ के गृह सचिव को यह सुनिश्चित करने का आदेश दिया है कि हड़ताल न होने के आदेश का पालन हो व पीजीआई की दैनिक गतिविधियां किसी भी स्थिति में प्रभावित न होने दी जाए। साथ ही याचिका पर भारत सरकार, यूटी प्रशासन, कर्मचारी यूनियनों व अन्य को नोटिस जारी करते हुए जवाब मांगा है।

याचिका दाखिल करते हुए पीजीआई चंडीगढ़ की ओर से सीनियर एडवोकेट अमित झांजी व एडवोकेट अभिषेक कुमार प्रेमी के माध्यम से हाईकोर्ट को बताया गया कि केंद्र सरकार ने 12 दिसंबर 2014 को आदेश जारी कर अनुबंध कर्मियों की व्यवस्था को समाप्त करने का आदेश दिया था। इसके बाद पीजीआई पर इसे लागू करने का आदेश जारी हुआ, लेकिन संस्थान को इस मामले में अंतरिम तौर पर मोहलत मिल गई थी। इसके बाद से ही लगातार अनुबंध कर्मचारी सेवा नियमित करने की मांग कर रहे हैं। इससे पहले पीजीआई के कर्मचारियों ने हड़ताल की घोषणा की थी और तब हाईकोर्ट ने हड़ताल के आदेश पर रोक लगाते हुए यह स्पष्ट कर दिया था कि यूनियन पीजीआई की व्यवस्था में बाधा नहीं बनेंगी। 
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अब पीजीआई चंडीगढ़ ने हाईकोर्ट को बताया कि सफाई कर्मचारी, सिक्योरिटी गार्ड, हॉस्पिटल अटेंडेंट व इलेक्ट्रिकल कॉन्ट्रैक्ट वर्कर यूनियन व इनकी ज्वाइंट एक्शन कमेटी ने 18 जनवरी से 20 जनवरी तक हड़ताल का निर्णय लिया था और परिसर में नारेबाजी आरंभ कर दी थी। पीजीआई के दखल के बाद 21 जनवरी को संस्थान व कर्मियों की बैठक हुई थी और इसके बाद 29 जनवरी को दोबारा बैठक हुई जिसमें कर्मियों ने अपनी मांगों को दोहराया। अब यूनियन और ज्वाइंट एक्शन कमेटी की ओर से 7 फरवरी से हड़ताल का निर्णय लिया गया है। याची ने हाईकोर्ट से अपील की कि इस मामले में दखल दिया जाए।

हाईकोर्ट ने कहा कि हम कई बार यह स्पष्ट कर चुके हैं कि स्वास्थ्य सेवाएं किसी भी स्थिति में बाधित नहीं होनी चाहिए। कर्मचारी यूनियन की हड़ताल पर हाईकोर्ट रोक लगा चुका है और आदेश को बाईपास करने के लिए नए नाम से यूनियन बना ली गई हैं। हमने आदेश दिया था कि यदि कोई हड़ताल करता है, तो पुलिस उसे तुरंत हिरासत में ले और कानूनी कार्रवाई की जाए। ऐसे में अब यह चंडीगढ़ के गृह सचिव की जिम्मेदारी है कि हमारे आदेश का किसी भी प्रकार से उल्लंघन न हो और पीजीआई का दैनिक कार्य किसी भी स्थिति में प्रभावित न हो।

अनुबंध कर्मचारियों की ज्वाइंट एक्शन कमेटी के चेयरमैन के पीजीआई में घुसने पर रोक
सुनवाई के दौरान पीजीआई ने बताया कि ज्वाइंट एक्शन कमेटी का चेयरमैन अश्विनी कुमार मुंजाल नियमित कर्मचारी था और रिटायर हो चुका है। उसका अब पीजीआई से कोई लेना देना नहीं है, लेकिन वह अनुबंध कर्मियों का नेतृत्व कर रहा है। हाईकोर्ट ने सख्त रवैया अपनाते हुए आदेश दिया है कि मुंजाल को पीजीआई के भीतर अगले आदेश तक प्रवेश की अनुमति न दी जाए।

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