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हाईकोर्ट ने हाउस टैक्स पर प्रशासन को नोटिस भेजा

Fri, 04 Sep 2015 11:14 PM IST
ब्यूरो/अमरउजाला, चंडीगढ़
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यूटी प्रशासन की ओर से चंडीगढ़ में लगाए गए हाउस टैक्स को पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट में चुनौती दी गई है। हाईकोर्ट ने प्रशासन को नोटिस जारी कर पांच अक्तूबर तक जवाब मांगा है।
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याचिका में टैक्स लागू करने के मामले में पंजाब एमसी एक्ट को दरकिनार करने और टैक्स से पहले आपत्तियां न मांगने के अलावा पार्षदों की सलाह न लेने का आरोप लगाया गया है।

सेक्टर-15 के अशोक जिंदल ने एडवोकेट अवनीश मित्तल के माध्यम से दायर याचिका में कहा गया है कि चंडीगढ़ में पंजाब एमसी एक्ट लागू होता है। एक्ट में प्रावधान है कि सरकार एमसी को निर्देश देगी कि वह टैक्स का अनुमान लगाए। इसके बाद ही टैक्स वसूली की जा सकती है।
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एक्ट में दूसरा प्रावधान यह भी है कि रिहायशी, कमर्शियल, फ्लैट, शैक्षणिक संस्थानों व कृषि भूमि को वर्गीकृत कर टैक्स तय किया जाए। चंडीगढ़ में ग्रामीण और शहरी क्षेत्र के हिसाब से टैक्स लिया जाता रहा है, लेकिन ऐसा कोई प्रावधान नहीं है कि सेक्टरों की जोनिंग की जा सके।

इसके विपरीत चंडीगढ़ में हाउस टैक्स की नोटिफिकेशन से पहले न तो टैक्स का अनुमान लगाया गया और न ही कोई आपत्ति मांगी गई। यह दलील भी दी गई कि पंजाब एमसी एक्ट में अभी तक रिहायशी भूमि, फ्लैट या अन्य इमारतों पर टैक्स नहीं निर्धारित किया गया और न ही अधिसूचित किया गया।

बावजूद इसके यूटी में टैक्स लगा दिया गया। यह भी कहा कि प्रशासन ने पिछले साल सितंबर में नगर निगम को एक पत्र भेजकर टैक्स पुनर्निधारित करने पर विचार करने को कहा था। इस पर पार्षदों में सहमति नहीं बन पाई। इसी बीच हाउस टैक्स लगा दिया गया।

निगम की कार्यशैली में दखलंदाजी
याचिका में चंडीगढ़ प्रशासन पर नगर निगम की कार्यशैली में दखलअंदाजी करने का आरोप लगाया गया है। कहा है कि चंडीगढ़ के अस्तित्व में आने के बाद साल 1994 में नगर निगम के गठन से पूर्व तक शहरी व संपदा कार्यों पर प्रशासन का नियंत्रण था।

निगम बनने के बाद शहरी कार्य निगम के अधिकार क्षेत्र में आ गए, बावजूद इसके प्रशासन निगम की कार्यशैली में दखलंदाजी करता आ रहा है। प्रशासन ने ही टैक्स की अधिसूचना जारी की। इससे पहले कोई आपत्ति नहीं मांगी गई। न ही शहर के पार्षदों से कोई राय ली गई। अधिकांश पार्षद समय-समय पर टैक्स का विरोध कर चुके हैं।
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