चंडीगढ़। राजनेता और बिल्डर एनके शर्मा की शिकायत पर पत्रकार की गिरफ्तारी के मामले में पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने कड़ा रुख अपनाते हुए अत्याचार व सत्ता के मनमाने प्रयोग पर पंजाब सरकार को जवाब दाखिल करने का आदेश दिया। हाईकोर्ट ने प्रेस के अधिकारों के हनन व अभिव्यक्ति की आजादी को लेकर भी पंजाब सरकार को जवाब दाखिल करने का आदेश दिया है।
जीरकपुर निवासी राजेंद्र सिंह तग्गर ने याचिका दाखिल करते हुए बताया कि वह पत्रकार हैं और विभिन्न मीडिया प्लेटफार्म के लिए काम करते हैं। उन्होंने एक समाचार प्रकाशित किया था, जिसमें बताया गया था कि एनके शर्मा ने सरकारी भूमि पर कब्जा कर प्रोजेक्ट बनाए हैं। इसके साथ ही कुछ लोगों ने शर्मा के खिलाफ शिकायत दी थी कि उनकी भूमि पर उनकी मंजूरी के बिना शर्मा प्रोजेक्ट बना रहे हैं।
एनके शर्मा ने पुलिस को शिकायत दी थी कि याची उन्हें बदनाम कर रहा है और इस प्रकार की खबरों से उन्हें वित्तीय नुकसान हो रहा है। इस प्रकार की खबरें केवल शिकायतकर्ता से उगाही के लिए चलाई जा रही हैं। पुलिस ने शिकायत के आधार पर याचिकाकर्ता को गिरफ्तार कर लिया था। याची ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल करते हुए जमानत देने की मांग की थी।
हाईकोर्ट ने पाया कि याची इस मामले में 1 माह 23 दिन जेल में रहा। ऐसे में हाईकोर्ट ने अब पंजाब सरकार को आदेश दिया है कि इस अत्याचार पर जवाब दाखिल करें जो न केवल कानून की प्रक्रिया का दुरुपयोग है, बल्कि प्रेस के अधिकार यानी भारतीय संविधान में निहित अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का उल्लंघन भी है। हाईकोर्ट ने कहा कि स्वतंत्र वातावरण नागरिकों को उपलब्ध करवाना राज्य का दायित्व है और यह लोकतंत्र की रीढ़ भी है, आखिरी क्यों इस दायित्व को निभाया नहीं जा रहा है। इन टिप्पणियों के साथ ही हाईकोर्ट ने याची को अंतरिम जमानत देते हुए याचिका का निपटारा कर दिया।