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Chandigarh News: भूमि सुधार कानून पर हाईकोर्ट की मुहर, भूमि जोतने वालों को मिलेगा मालिकाना हक

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ढोलीदार, बूटीमार, भोंडेदार और मुकररिदारों के हक में भूमि का मालिकाना हक देने को बताया सही
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चंडीगढ़। पंजाब-हरियाणा उच्च न्यायालय ने हरियाणा के भूमि सुधार कानून हरियाणा ढोलीदार, बूटीमार, भोंडेदार और मुकररिदार (स्वामित्व अधिकार अधिनियम, 2010) की संवैधानिक वैधता को बरकरार रखते हुए भूमि जोतने वालों को मालिकाना हक देने के फैसले को सही करार दिया है। भूमि के असल मालिकों को भी तय प्रावधानों के तहत मुआवजा देने का हाईकोर्ट ने आदेश दिया है।
सुशील कुमार व अन्य ने याचिका दाखिल करते हुए हरियाणा ढोलीदार, बूटीमार, भोंडेदार और मुकररीदार (स्वामित्व अधिकार अधिनियम, 2010) की संवैधानिक वैधता को चुनौती दी थी। याचिका में तर्क दिया कि अधिनियम के तहत ढोलीदारों और भूमि के अन्य वर्ग के किरायेदारों को दिया गया स्वामित्व वास्तविक मालिकों को पर्याप्त मुआवजा देने के बाद ही दिया जाना चाहिए। ऐसा किए बिना यह संविधान के अनुच्छेद 300-ए के तहत संपत्ति के अधिकारों का उल्लंघन है।
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सरकार की ओर से कहा गया कि भले ही उपरोक्त श्रेणी के व्यक्ति कई पीढिय़ों से भूमि पर खेती कर रहे हैं, लेकिन वे ऐसी भूमि को बेचने या पट्टे पर देने या गिरवी रखने या वित्तीय संस्थानों से ऋण लेने में सक्षम नहीं थे। इसके परिणामस्वरूप उनके परिवारों को अनावश्यक कठिनाई का सामना करना पड़ा। इन श्रेणियों से संबंधित व्यक्ति अपने समुदाय को सेवाएं प्रदान कर रहे हैं और जीवनयापन के लिए भूमि अपने पास रखे हुए हैं, लेकिन वे भूमि के पूर्ण मालिक नहीं हैं, जिससे उनका दुख बढ़ गया है। कानून में उन भूमि मालिकों को प्रतीकात्मक मुआवजे के भुगतान के लिए प्रावधान किया गया है जिनके भूमि पर अधिकार समाप्त हो गए हैं।

हाईकोर्ट ने कहा कि कानून ने बिचौलियों की भूमिका को समाप्त कर दिया और भूमि जोतने वालों के अधिकारों को मान्यता दी जो कृषि सुधार की दिशा में अच्छा कदम है। कोर्ट ने कहा कि यह कानून संविधान के अनुच्छेद 31-ए के तहत संवैधानिक प्रतिरक्षा के दायरे में आएगा और इसलिए, यह अनुच्छेद 300-ए के तहत संपत्ति के अधिकारों का उल्लंघन नहीं होगा।

कोर्ट ने कहा कि इस कानून ने कृषि सामंतवाद की खराब कार्यप्रणाली से निजात दिलाने मे मदद की है। हाईकोर्ट ने कहा कि यह एक प्रशंसनीय कृषि सुधार है जिसने कृषि सामंती से मुक्ति दिलाई है। ऐसे में हाईकोर्ट ने इन श्रेणियों के लोगों को भूमि पर अधिकार के लिए आवेदन करने का निर्देश दिया है।
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ढोलीदार जमीन का एक प्रकार का किरायेदार होता है जिसे समाज सेवा के उद्देश्य से उपहार के रूप में जमीन मिलती है। बटिमार भी किरायेदार होता है जो जंगल साफ करता है और भूमि को खेती के लायक बनाता है। भोंडेदार धर्मनिरपेक्ष सेवा जैसे गांव के चौकीदार या दूत के कर्तव्यों के लिए भूमि दी जाती है। अधिनियम के अनुसार उपरोक्त श्रेणी की भूमि जोतने वाले, जो 20 वर्ष से अधिक समय से राजस्व अभिलेखों में इसी रूप में दर्ज हैं उन्हें भूमि का मालिकाना अधिकार एवं अन्य सभी अधिकार प्राप्त होंगे।
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