सिटी ब्यूटीफुल चंडीगढ़ की पहचान सुखना लेक के वजूद को लेकर पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने फिर गहरी चिंता जताई है। इस मामले में हाईकोर्ट द्वारा लिए गए स्वत: संज्ञान पर मंगलवार को सुनवाई के दौरान जस्टिस एके मित्तल और जस्टिस रामेंद्र जैन की खंडपीठ ने झील को बचाने के लिए ट्राईसिटी- चंडीगढ़, मोहाली और पंचकूला के सभी निवासियों को आगे आकर अपने सुझाव देने की अपील की है।
हाईकोर्ट का कहना है कि सुखना लेक को बचाने की मुहिम को आम लोगों को भी शामिल किया जाना चाहिए। खंडपीठ ने कहा कि सुखना लेख को अब सिर्फ पहाड़ों पर होने वाली बारिश के भरोसे नहीं छोड़ा जा सकता। सुखना लेक में पानी के लिए अन्य विकल्प भी तलाशे जाने जरुरी हैं। इसके साथ ही जस्टिस एके मित्तल और जस्टिस रामेंद्र जैन की खंडपीठ ने पंजाब, हरियाणा और चंडीगढ़ के आला अधिकारियों को भी निर्देश जारी किए कि वे एक बैठक करके सुखना लेक को बचाने और इसमें अन्य विकल्पों या कृत्रिम साधनों से पानी भरे जाने की संभावनाएं तलाशें। सुखना लेक में पानी के गिरते स्तर पर चिंता जताते हुए हाईकोर्ट ने कहा कि इसके बचाव के लिए अब सभी विकल्पों पर काम करना जरूरी हो गया है।
हाईकोर्ट ने कहा कि लगातार इसका जलस्तर गिरता जा रहा है। यह विकट स्थिति पैदा करने वाला है। यही हालात रहे तो सुखना के सूखने का खतरा बन सकता है। उन्होंने कहा कि सुखना लेक केवल चंडीगढ़ की ही पहचान नहीं है बल्कि पंजाब व हरियाणा की पहचान भी इससे जुड़ी है। खंडपीठ ने कोर्ट में उपस्थित पंजाब और हरियाणा के वकीलों को नसीहत दी कि इस मामले में वे एक-दूसरे के प्रतिवादी जैसा व्यवहार न करें बल्कि सुखना को अपनी धरोहर मानते हुए इसके बचाव के लिए परस्पर सहयोग करें। हाईकोर्ट ने सुखना लेक के कैचमेंट में निर्माण और अन्य मुद्दों को बाद में विचार के लिए छोड़ते हुए लेक के गिरते जलस्तर को प्राथमिकता के आधार पर सुनने का निर्णय लेते हुए कहा कि इस समय सुखना लेक का जलस्तर सबसे ज्यादा मायने रखता है। इस समस्या का समाधान होने के बाद बाकी मुद्दों पर विचार किया जाएगा।
tanubedi@yahoo.com पर दें सुझाव
हाईकोर्ट ने सुखना लेक से संरक्षण के लिए ट्राइसिटी के सभी निवासियों से सुझाव देने की अपील की है। ट्राईसिटी के लोग अपने सुझाव इस मामले हाईकोर्ट द्वारा एमिक्स क्यूरे नियुक्त की गईं एडवोकेट तनु बेदी के ई-मेल आईडी tanubedi@yahoo.com पर देने को कहा है। इस ई-मेल आईडी पर भेजे जाने वाले सुझावों पर हाईकोर्ट गौर करेगा। हाईकोर्ट ने सुझावों के लिए तीन हफ्ते का समय दिया है। इस पर चंडीगढ़, पंजाब और हरियाणा की ओर से हाईकोर्ट में कहा गया कि सुझाव मांगने के लिए वे हाईकोर्ट के साथ हैं और इन आदेशों का प्रचार किया जाएगा ताकि ज्यादा से ज्यादा संख्या में लोग अपने सुझाव दें।