लेह और उसके आसपास इंडस नदी के किनारे विभिन्न प्रकार के पेट्रोग्लिफ्स या रॉक आर्ट देखने को मिलते हैं। इनमें मुख्य रूप से जंगली और पालतू जानवरों की आकृतियां, शिकार के दृश्य, मानव आकृतियां, प्रतीकात्मक चिन्ह, नृत्य और धार्मिक-आध्यात्मिक गतिविधियों को दर्शाने वाले चित्र शामिल हैं।
लेह में विकास कार्यों की रफ्तार के बीच अब धरोहरों की चिंता भी तेज हो गई है। इंडस नदी के किनारे और आसपास मौजूद हजारों साल पुराने रॉक आर्ट (पेट्रोग्लिफ्स) को बचाने के लिए भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) की टीम लेह में इन्हें बचाने का काम कर रही है।
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टीम ने प्रभावित स्थलों का निरीक्षण किया है और मौजूद शिला चित्रों का विस्तृत दस्तावेज तैयार करना शुरू कर दिया है ताकि इन अनमोल धरोहरों को नुकसान से बचाया जा सके।
इंडस नदी के तटों पर मौजूद ये प्राचीन शिलाचित्र न सिर्फ लद्दाख के इतिहास की गवाही देते हैं, बल्कि क्षेत्र की सांस्कृतिक विरासत का अभिन्न हिस्सा भी हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि ये चित्र मानव सभ्यता के शुरुआती दौर की जीवनशैली, मान्यताओं और परंपराओं को दर्शाते हैं लेकिन हाल के वर्षों में सड़क निर्माण और अन्य विकास परियोजनाओं के कारण इन धरोहरों पर नुकसान पहुंचने का खतरा मंडरा रहा है।
लद्दाख की इस धरोहर का जायजा लेने के लिए टीम में एएसआई के चंडीगढ़ सर्कल के साथ काम करने वाले मिनी सर्कल लेह की टीम ने यह सर्वे किया है। इसका नेतृत्व एएसआई के अतिरिक्त महानिदेशक (संरक्षण) जहनवीज शर्मा ने किया। टीम ने दौरे के दौरान प्रभावित स्थलों का बारीकी से निरीक्षण किया और मौजूद शिला चित्रों का विस्तृत दस्तावेज तैयार किया। अधिकारियों ने यह भी सुनिश्चित किया कि विकास की आड़ में इन्हें न नुकसान पहुंचा दिया जाए।
स्थानीय प्रशासन को समझाई जाएगी इन धरोहरों की अहमियत
एएसआई के अधिकारियों के अनुसार इन धरोहरों को बचाने के लिए कई ठोस कदम उठाए जाएंगे। खतरे में पड़े पेट्रोग्लिफ्स को सुरक्षित स्थानों पर रखा जाएगा। प्रोटेक्टिव बैरियर्स लगाए जाएंगे ताकि निर्माण कार्यों से इन्हें सीधा नुकसान न हो। जागरूकता अभियान चलाकर निर्माण एजेंसियों और स्थानीय प्रशासन को इन धरोहरों की अहमियत समझाई जाएगी ताकि वह निर्माण कार्य या सड़क बनाने के दौरान इन्हें नुकसान न पहुंचाएं।
2000 से 4000 साल पुराने माने जाते हैं चित्र
विशेषज्ञों के अनुसार लेह और उसके आसपास इंडस नदी के किनारे विभिन्न प्रकार के पेट्रोग्लिफ्स या रॉक आर्ट 2000 से 4000 साल पुराने माने जाते हैं, जबकि कुछ प्रतिमाएं तो प्राचीन ब्रॉन्ज एज से संबंधित हैं। इंडस नदी के किनारे फैले कई गांवों और घाटियों में यह रॉक आर्ट मौजूद है। एक अधिकारी के अनुसार प्रसिद्ध स्थानों में डोमखर, दाह, खाल्त्से, सास्पोल, बेसगो आदि शामिल हैं।