पीजीआई स्थित केमिस्ट शॉप में बिकने वाली दवाओं के मैक्सिमम रिटेल प्राइस (एमआरपी) में सनसनीखेज खुलासा हुआ है। पीजीआई मेडिकल टेक्नोलाजिस्ट एसोसिएशन (एमटीए) के हाथ दो सर्जिकल ट्यूब लगी हैं। एक ट्यूब पीजीआई के केमिस्ट शॉप से खरीदी गई तो दूसरी पीजीआई के बाहर से।
जो दवा पीजीआई से खरीदी गई, उसका एमआरपी 150 रुपये ज्यादा है। दोनों ही एक कंपनी की हैं। दोनों का एक ही बैच नंबर है। दोनों की मैन्यूफैक्चरिंग, एक्सपायरी व बार कोडिंग भी एक ही है, लेकिन दोनों का एमआरपी अलग-अलग है। जो दवा पीजीआई के बाहर से खरीदी गई है, उस पर एमआरपी 300 रुपये है और जो पीजीआई से खरीदी गई उसका एमआरपी रेट 450 रुपये है।
एसोसिएशन के जनरल सेक्रेटरी अश्विनी मुंजाल ने सवाल उठाया है कि जब दोनों दवाओं का एक ही बेच नंबर है तो एमआरपी अलग कैसे हो सकता है। उन्होंने बताया कि पीजीआई में इस तरह से गोरखधंधा करके मरीजों को ठगा जा रहा है। इस बारे में पीजीआई प्रशासन को कई बार शिकायत दी, लेकिन अब तक कोई कार्रवाई नहीं की गई है।
सीबीआई से की जांच की मांग
पीजीआई एमटीए के जनरल सेक्रेटरी अश्विनी मुंजाल ने कहा कि पीजीआई में आने वाले हर मरीज के साथ धांधली की जा रही है। दवाओं में ज्यादा एमआरपी लिखकर मरीजों से ठगी की जा रही है। केमिस्ट शॉप वाले कंपनियों के साथ साठगांठ कर दवाओं पर ज्यादा एमआरपी लिखवा रहे हैं। उन्होंने सीबीआई से सिफारिश की है वे इस बड़े घोटाले की जांच करे। केमिस्ट शॉप और उनके कागजात खंगाले जाएं, ताकि नेक्सस का पता चल सके। उनका कहना है कि उनके पास कई बार मरीजों ने इस बारे में शिकायत की थी, लेकिन इस बार सबूत भी हाथ लग गया है।
महंगा किराया होने की वजह से केमिस्ट ऐसी धांधली करते हैं
पीजीीआई में दवा की कीमतों में धांधली
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पीजीआई की केमिस्ट शॉप का किराया सबसे महंगा है। महंगा किराया होने की वजह से केमिस्ट शॉप वाले इसी तरह की धांधली करते हैं। इस बारे में अमर उजाला पहले भी खुलासा कर चुका है। इसमें बताया गया था कि जिस दुकान का किराया ज्यादा, वह सबसे महंगी दवाएं बेचता है। कई बार सामाजिक संगठन और अन्य लोग मुद्दा उठा चुके हैं कि केमिस्ट शॉप का किराया कम किया जाए, लेकिन अब तक ऐसा संभव नहीं हो सका है।
सस्ती दवाएं मिलने पर लगेगा दो हफ्ते का वक्त
पीजीआई में अमृत नाम के प्रोजेक्ट से दो दवाओं की दुकानें खुलनी थीं। इसके लिए पीजीआई प्रशासन की ओर से नेहरू हास्पिटल में जगह भी दी चुकी है, लेकिन अब तक दुकान खुलने का काम पूरा नहीं हो सका। बताया जा रहा है कि दुकान खुलने में कम से कम दो हफ्ते का वक्त और लगेगा।
इन दुकानों में एक जेनरिक और एक ब्रांडेड दवाओं की होगी। इसके अलावा पीजीआई ने भी अपनी एक केमिस्ट शॉप खोलने का निर्णय लिया था। इसे पीजीआई के इंस्टीट्यूट बॉडी की ओर से हरी झंडी भी मिल चुकी है, लेकिन दो साल गुजरने वाले हैं अब तक दुकानें नहीं खुल पाईं।
पीजीआई में एक जेनरिक स्टोर का उद्घाटन
पीजीआई में सोमवार को न्यू ओपीडी के द्वितीय तल पर एक जेनरिक स्टोर खुलने जा रहा है। इसका उद्घाटन केमिकल एंड फर्टिलाइजर के राज्य मंत्री हंसराज गंगाराम अहीर करेंगे। इसमें मरीजों को जेनरिक दवा देने का दावा किया जा रहा है। न्यू ओपीडी में एक भी जेनरिक स्टोर नहीं था। यदि दवाएं यहां पर रहती हैं तो जरूर मरीजों को फायदा मिलेगा।