प्रदेश में पाला आमतौर पर दिसंबर से फरवरी के महीने में ही पड़ता है। पाले के कारण फसलों, सब्जियों व छोटे फलदार पौधों व नर्सरी पर इसका हानिकारक प्रभाव पड़ता है। फसलों, सब्जियों व छोटे फलदार तनों, फूलों, फलों में उपस्थित द्रव बर्फ के रूप में जम जाते हैं और ये पौधों की कोशिकाओं को नष्ट कर देते हैं।
पाले से फसलों का ऐसे करें बचाव
पाले का हानिकारक प्रभाव अगेती सरसों, आलू, फलों व सब्जियों की नर्सरी और छोटे फलदार पौधों पर पड़ सकता है। इससे बचाव के लिए किसान भाई यदि पानी उपलब्ध हो तो विशेषकर ऊपर लिखित फसलों, सब्जियों व फलदार पौधो में सिंचाई करें, ताकि जमीन का तापमान बढ़ सके।
खेत के किनारे पर और 15 से 20 फुट की दूरी के अंतराल पर जिस ओर से हवा आ रही है, रात्रि के समय कूड़ा-कचरा, सूखी घास आदि एकत्रित कर धुआं करना चाहिए, ताकि वातावरण का तापमान बढ़ सके और पाले का हानिकारक प्रभाव न पड़े। सीमित क्षेत्र में लगी हुई फल व सब्जियों की नर्सरी को टाट, पॉलीथिन और भूसे से ढकें।
- स्थान अधिकतम न्यूनतम
- अंबाला 16.8 5.0
- भिवानी 20.7 4.5
- हिसार 18.0 2.7
- करनाल 17.2 3.6
- नारनौल 19.8 1.6
- रोहतक 15.5 3.2
- सिरसा 16.8 3.2
- कुरुक्षेत्र 17.0 3.6