कम बारिश के बाद हरियाणा में सूखे की स्थिति को लेकर सुप्रीम कोर्ट से लगी फटकार के बाद भी प्रदेश में अजीब स्थिति बनी हुई है।
कृषि विभाग जहां धान की बेहतरीन फसल के लिए अवार्ड की दलील दे रहा है तो सिंचाई विभाग का मानना है कि पानी की किल्लत है।
खासकर दक्षिण हरियाणा पर इसका असर पड़ रहा है। पानी की कमी की आशंका के मद्देनजर नहरी पानी की आपूर्ति में लगने वाले कट भी बढ़ा दिए गए हैं, ताकि बारिश होने से पहले पानी की किल्लत का सामना नहीं करना पड़े।
मानसून के दौरान अलग-अलग नहरी स्रोतों से हरियाणा के अलग-अलग जिलों में 27700 क्यूसिक नहरी पानी की आपूर्ति की जा रही है। इसके अलावा दूसरे मौसम में यह आंकड़ा घटकर 11500-13000 क्यूसिक तक पहुंच जाता है।
मांग और आपूर्ति में बड़े अंतर को कम करने के लिए कट लगाए जा रहे हैं, ताकि बारिश के अलावा दूसरे मौसम में पानी की किल्लत का सामना नहीं करना पड़े।
कृषि विभाग के अधिकारी के मुताबिक प्रदेश में सूखे की स्थिति पर निगरानी रखने की जिम्मेवारी राजस्व विभाग की है। विभाग की दलील है कि धान की अच्छी फसल को देखते हुए प्रदेश को अवार्ड से भी नवाजा गया है।
उधर, सिंचाई विभाग का मानना है कि प्रदेश में पानी की कमी रहती है। बारिश अगर अच्छी हुई तो हालात में कुछ सुधार होगा। पानी की आपूर्ति में कट लगाया जा रहा है, आगे भी इसके जारी रहने की उम्मीद है।
इंजीनियर इन चीफ एके गुप्ता के मुताबिक पानी की कमी से निपटने के लिए विभाग की ओर से सभी तैयारियां की जा रही हैं।
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हरियाणा में पानी की उपलब्धता (क्यूसिक में)
प्रणाली मानसून अन्य मौसम
भाखड़ा कैनाल 9500 9500
यमुना कैनाल 17000 1500-3000
गुड़गांव आगरा कैनाल 1200 11400-13000
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आपूर्ति में बढ़े कट
भाखड़ा, यमुना कैनाल के अलावा गुड़गंाव-आगरा कैनाल में अलग-अलग अंतराल पर आपूर्ति में कट लगाया जाता है, ताकि पानी की कमी का प्रदेश को सामना नहीं करना पड़े। इसके तहत 24 दिन के अंतराल पर 8 दिन की आपूर्ति तो कई बार 16 दिनों के बाद आठ दिन की आपूर्ति की जाती है। इस बार की स्थिति को देखते हुए पांच बार तक की कटौती की जा रही है यानी हर 32 दिन के अंतराल के बाद आठ दिन तक की आपूर्ति करना विभाग की मजबूरी बन चुका है।