इस बार भी इन नेताओं ने मंच से राष्ट्रवाद के ही मुद्दे उछाले। पाक समर्थित आतंकवाद को मुंहतोड़ जवाब देने की बात हुई। आतंकवाद में शहीद होने वाले जवानों की बात हुई, जम्मू-कश्मीर में खत्म किए गए अनुच्छेद 370 का भी मंच से जमकर शोर मचाया गया।
बाहर से आए नेताओं ने ही नहीं, बल्कि हरियाणा में भाजपा के प्रत्याशियों तक ने इन राष्ट्रीय मुद्दों को अपनी जीत का आधार बनाने की कोशिश की। वहीं रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने भी अपने मंच से राफेल और उसकी पूजा को लेकर विरोधियों पर निशाना साधा। कई रैलियों में राफेल का विशेष रूप से जिक्र भी किया।
मगर विडंबना यह रही कि हरियाणा के इस चुनावी समर में न तो राष्ट्रवाद का कार्ड चला और न ही अनुच्छेद 370 का मुद्दा स्थानीय मतदाताओं पर अपना असर दिखा पाया। दूसरी ओर, कांग्रेस ने भी आर्थिक मंदी, बेरोजगारी, भ्रष्टाचार, हरियाणा में बढ़ता अपराध, क्राइम अंगेस्ट वूमैन, घोटाले इत्यादि मुद्दों से भी भाजपा की घेराबंदी की थी।
इसके अलावा कांग्रेस का संकल्प पत्र में किए गए वादों में भी मतदाताओं ने दिलचस्पी दिखाई। इसका असर यह रहा कि वर्ष 2014 के विधानसभा चुनाव में 15 सीटों पर सिमटी कांग्रेस इस बार 31 सीटों तक पहुंच गई। जबकि जजपा ने भी अपने स्थानीय मुद्दों के बूते 10 सीटों पर जीत दर्ज की।