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बाय बाय 2016: धक्के से चल रही रोडवेज की गाड़ी, न बसें और न कर्मचारी

Thu, 29 Dec 2016 02:53 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
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haryana roadways
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रफ्तार और सुरक्षित सफर में अव्वल हरियाणा रोडवेज की गाड़ी सरकार की अनदेखी के चलते हिचकोले खा रही है। न तो बसों का बेड़ा बढ़ा, न ही कर्मचारियों की भर्ती हुई। कर्मचारी आंदोलनों से सहमी सरकार बातचीत से मांगों का समाधान करने का दम तो कई बार भर चुकी है, लेकिन धरातल पर कोई अमल नहीं हुआ। रोडवेज कर्मियों और सरकार के बीच टकराव बरकरार है। इस साल भी रोडवेज की गाड़ी पटरी पर नहीं आ पाई। नए साल में हालात सुधरने की आस सिर्फ और सिर्फ सरकार के रुख पर टिकी है, अगर अफसरशाही ने कर्मचारियों की मांगों को पूरा कराने में दिलचस्पी दिखाई तो ही आंदोलनों पर विराम लगेगा।
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हकीकत नहीं बन सके वादे
भाजपा ने सत्ता में आने से पहले कर्मचारियों के साथ वादे तो बहुत किए, लेकिन सरकार बनने के बाद उन्हें लगभग नजरअंदाज ही कर दिया। न तो पंजाब के समान वेतनमान दिया, न ही कच्चे कर्मचारी नियमित हुए। पूर्व सरकार की नियमितीकरण पालिसी भी वापस ले ली। अस्थायी भर्ती बंद करने का दावा भी औंधे मुंह गिरा। ठेके और अनुबंध पर भर्तियां बदस्तूर जारी हैं। आउटसोर्स कर्मियों को न्यूनतम मजदूर और वेतन देने का वादा भी अभी तक चुनावी ही साबित हुआ है।

बसों का बेड़ा 4160 पर अटका
हरियाणा परिवहन विभाग रोडवेज का बेड़ा बढ़ाने में नाकाम रहा है। सरकार ने सत्ता में आते ही रोडवेज बसें पांच हजार करने की घोषणा की थी। तीन बार कर्मचारियों यूनियनों की परिवहन मंत्री के साथ वार्ता भी हो चुकी, बावजूद उसके 4160 से आगे बसों की संख्या नहीं जा सकी है। इनमें से भी 3500 बसें ही ऑन रोड हैं, 660 बसें चालकों-परिचालकों की कमी के कारण विभिन्न जिलों के डिपुओं में खड़ी हैं।
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1991 में 3884 तो 2016 में लगभग 42 सौ

हरियाणा रोडवेज बस - फोटो : ‌file photo
1991 में रोडवेज बसों का बेड़ा 3884 का था और जनगणना के अनुसार जनसंख्या एक करोड़ थी। अब जनसंख्या पौने तीन करोड़ पहुंच चुकी है और बसें लगभग 42 सौ ही हैं। रोडवेज कर्मचारी यूनियनें तो जनसंख्या के लिहाज से दस हजार बसों की मांग करती हैं, मगर सरकार इन्हें पांच हजार पहुंचाने में ही हांफ रही है।

एचआरईसी में पांच माह से कोई चेसी नहीं
हरियाणा रोडवेज इंजीनियरिंग कारपोरेशन गुरुग्राम में पांच महीने से नई बस की कोई चेेसी तैयार होने के लिए नहीं आई। कर्मचारियों को चार महीने से पगार केलाले पड़े हुए हैं। 50 बसें पंजाब रोडवेज की कारपोरेशन में बनने के लिए पांच दिन पहले आई हैं, ये भी एक-दो महीने में तैयार हो जाएंगी, फिर हालात जस केतस हो जाएंगे।

अधर में तीन सौ बसों का प्रस्ताव
इसी साल दो अगस्त को परिवहन मंत्री कृष्ण लाल पंवार ने रोडवेज कर्मचारी यूनियनों के साथ बैठक में जल्दी तीन सौ बसें खरीदने की बात कही थी, मगर अभी तक कोई चेसी नहीं आई। नई बसें खरीदने का प्रस्ताव अधर में ही है। हर महीने सौ बसें कंडम हो रही हैं, इससे रोडवेज का बेड़ा कम होता जा रहा है।

68 सौ पद कर्मचारियों के खाली

हरियाणा रोडवेज
रोडवेज में चालक से लेकर सफाई कर्मी तक के 68 सौ पद खाली पड़े हुए हैं। 1898 के बाद रोडवेज वर्कशाप में भी कर्मचारियों की भर्ती नहीं हुई। इससे रोजगार भी खत्म हुए हैं। कर्मचारी यूनियनें सरकार पर बेरोजगारी बढ़ाने का आरोप भी लगाती रही हैं। सरकारों ने वादों के अनुरूप कर्मियों की भर्ती की होती तो इतने पद आज खाली न होते।

82 सौ कर्मी हुए पक्का
सरकार ने कर्मचारी आंदोलनों के बाद इस साल बीते महीने 2003 से 2014 के बीच भर्ती हुए कच्चे कर्मियों को नियमित किया है। मगर इनका 338 करोड़ का एरियर सरकार देने से मना कर चुकी है। सातवें वेतनमान का लाभ भी इन्हें जनवरी 2016 से देने की बजाय जुलाई से दिया जाएगा। चार सौ कर्मियों को पक्का करने से छोड़ दिया गया है। तकनीकी वेतनमान पर लगी एसीपी को वापस देने का सरकार पत्र जारी कर चुकी है, जिस पर आंदोलन जारी है। 29 दिसंबर को रोडवेज वर्कर्स यूनियन पानीपत में परिवहन मंत्री के आवास का घेराव करेगी।

नकद में नहीं मिल रही पगार, स्टाफ परेशान
रोडवेज कर्मियों ने नोटबंदी के बाद हालात सामान्य होने तक हर महीने पगार नकद में देने की मांग की भी, लेकिन सरकार दस हजार ही नकद दे रही है। इससे 24 घंटे ड्यूटी बजाने वाले कर्मियों को घर चलाने में दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।

इस साल हुए दो बार चक्का जाम
रोडवेज कर्मचारी अपनी मांगों को लेकर इस साल 30 अप्रैल और दो सितंबर को दो बार चक्का जाम कर चुके हैं। 14 दिसंबर को दो घंटे की भूख हड़ताल की। कर्मचारी मांगें पूरी न होने पर नए साल में भी सरकार को झटका देने की तैयारी में हैं और यूनियनें फिर से चक्का जाम करने की रणनीति बना रही हैं।
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नई बसों और भर्ती की उम्मीद

बस में चढ़ने को मशक्कत करते लोग
2017 में रोडवेज का बेड़ा बढ़कर कम से कम पांच हजार होने और खाली पदों पर कर्मचारियों की भर्ती की उम्मीद है। रोडवेज में नए साल में छह सौ बसें शामिल करने का खाका तैयार हो चुका है। अत्यंत जरूरी पदों पर भर्ती का प्रस्ताव भी विचाराधीन है।

हालात सुधरने की नहीं उम्मीद : पूनिया
हरियाणा रोडवेज वर्कर्स यूनियन के अध्यक्ष सरबत सिंह पूनिया का कहना है कि नई साल में भी हालात सुधरने की उम्मीद कम ही है। चूंकि परिवहन विभाग की नीतियां रोडवेज को गर्त में धकेलने जैसी हैं। कर्मियों का एलटीसी और बोनस का पैसा लंबित पड़ा हुआ है। अधिकारी रोडवेज को निजीकरण की तरफ बढ़ा रहे हैं। गुरुग्राम में पांच सौ बसें निजी आपरेटरों की सिटी बस के नाम पर चलाने की योजना है।

तकनीकी वेतनमान पर बनाई समिति, नहीं होगा निजीकरण
परिवहन मंत्री कृष्ण लाल पंवार ने कहा कि हरियाणा रोडवेज का निजीकरण किसी सूरत में नहीं होगा। बसों का बेड़ा बढ़ाने के लिए तीन सौ बसों का आर्डर दिया जा चुका है। जल्दी बसों की चेसी आ जाएंगी। सरकार से चर्चा के बाद कर्मशाला कर्मियों के तकनीकी वेतनमान के मुद्दे को लेकर समिति गठित कर दी गई है। कर्मचारियों के साथ वार्ता कर हर मुद्दे को सुलझा लिया जाएगा। खाली पदों पर भर्ती करने की प्रक्रिया भी चल रही है।
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