चार दिन में 18 करोड़ बहाने के बाद हड़ताल खत्म
चार दिन तक जनता की फजीहत कराने और 18 करोड़ रुपये की चपत लगने के बाद प्रदेश सरकार रोडवेज कर्मचारियों के सामने झुक गई। न केवल कर्मचारियों की मांगों को माना, बल्कि सख्ती दिखाने के लिए निलंबित किये गए कर्मचारियों को भी बहाल कर दिया। पांच घंटे की मैराथन बैठक और पांच दौर की वार्ता के बाद सरकार और रोडवेज कर्मचारी यूनियनों के नेताओं में एक राय बनी।
बसों का चक्का जाम खत्म कराने के लिए फरवरी 2017 की अपनी परिवहन नीति वापस लेने के साथ ही निजी बस आपरेटरों को दिए 853 परमिट निरस्त कर दिए हैं। जबकि निजी बसों के पुराने परमिट बने रहेंगे। देर शाम सभी डिपो से 3700 बसों का संचालन शुरू होने से यात्रियों के साथ ही सरकार ने भी राहत की सांस ली।
रोडवेज कर्मचारियों से समझौते की पटकथा बुधवार रात परिवहन मंत्री कृष्ण लाल पंवार और रोडवेज कर्मचारी नेता सरबत पूनिया ने पंचकूला में लिख दी थी। उम्मीद जताई जा रही थी कि वीरवार को बैठक में इसकी घोषणा औपचारिक रूप से कर दी जाएगी, लेकिन परिवहन मंत्री और उच्च अधिकारियों ने रोडवेज की आठ यूनियनों के नेताओं के सामने एक बार फिर रूट परमिट और परिवहन नीति को लेकर चाल चली।