हरियाणा रोडवेज की हड़ताल के समर्थन में सभी विभागों के दो लाख से ज्यादा कर्मचारी हड़ताल पर थे। इस कारण दर्जनों विभागों में कामकाज भी ठप रहा। अनेक विभागों, बोर्डों, निगमों, नगर निगमों, पालिकाओं, परिषदों, विश्वविद्यालयों, सहकारी समितियों, केंद्र एवं राज्य सरकार की संचालित परियोजनाओं में हड़ताल का व्यापक असर दिखाई दिया। हड़ताल का सबसे ज्यादा असर बिजली वितरण निगमों में रहा।
निजीकरण सहन नहीं, उत्पीड़न से नहीं खत्म होगा आंदोल
बता दें कि रोडवेज कर्मचारी निजीकरण और किलोमीटर स्कीम का विरोध कर रहे थे। जबकि सरकार अपने फैसले से टस से मस होने को तैयार नहीं थी। हाईकोर्ट के दखल के बाद ही यूनियन नेताओं ने हड़ताल खत्म करने का आश्वासन दिया था। हाईकोर्ट ने हरियाणा सरकार द्वारा जारी बर्खास्तगी और निलंबन आदेश 14 सितंबर तक सस्पेंड करते हुए सभी निलंबित और बर्खास्त कर्मचारियों को भी सेवाओं में लौटने का आदेश दिया था।
यूनियन नेताओं के इस आश्वासन पर हाईकोर्ट ने हरियाणा में हड़ताल के चलते एस्मा के तहत जिन कर्मियों के खिलाफ कार्रवाई की है उस पर भी रोक लगा दी थी। साथ ही इस हड़ताल में जिस किसी भी अन्य विभाग के कर्मी शामिल हुए थे उन पर भी किसी भी तरह की कार्रवाई को अगली सुनवाई तक निलंबित कर दिया था। इसके साथ ही हाईकोर्ट ने कर्मचारी नेताओं को सरकार के साथ बैठक कर हल निकालने को था है।
सियासत भी हो गई थी शुरु
हरियाणा रोडवेज की हड़ताल पर सियासत भी गरमाना शुरु हो गई थी। हड़ताल को लंबा खिंचते देख और जनसमर्थन मिलने पर कांग्रेस और इनेलो ने हड़ताल को अपना पूरा समर्थन देना शुरु कर दिया था। जिलों में धरना स्थलों पर रोजाना कांग्रेस और इनेलो के नेता पहुंच रहे थे। कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष अशोक तंवर ने सभी हड़ताली कर्मचारियों की यूनियनों को पत्र लिखकर कांग्रेस का समर्थन दिया था। उन्होंने पत्र में हड़ताल को जायज ठहराते हुए किलोमीटर स्कीम के तहत 700 बसें लाने का कड़ा विरोध किया था।