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18 दिन बाद खत्म हुई हरियाणा की सबसे बड़ी हड़ताल, सड़कों पर दौड़ने लगी रोडवेज बसें

Sun, 04 Nov 2018 09:11 AM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
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Haryana Roadways - फोटो : File Photo
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आखिरकार 18 दिन लंबी हरियाणा रोडवेज की हड़ताल खत्म हो गई है। शनिवार को हरियाणा की सड़कों पर बसों ने फर्राटा भरा। यह अब तक हरियाणा के इतिहास की यह सबसे बड़ी हड़ताल थी। हड़ताली कर्मचारियों को डिपुओं में ही ज्वॉइनिंग दी गई। इस दौरान सिटी रूट के अलावा लंबी रूटों पर भी बसें चल रही हैं। वहीं हड़ताल के दौरान आउटसोर्सिंग नीति-वन के तहत रखे गए कर्मचारियों की सेवाएं भी समाप्त हो गई हैं। इन्हें ठेकेदार के जरिए बसें चलाने के लिए रखा गया था।

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बता दें कि शुक्रवार को पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट ने दिवाली का हवाला देते हुए हड़ताल खत्म करवाया था। पूरे प्रदेश में कर्मचारी काम पर लौट आए हैं। इस दौरान उन्होंने मिठाई बांट कर खुशी भी जाहिर की।

बता दें कि इससे पहले रोडवेज के हड़ताली कर्मचारी और सरकार दोनों ही झुकने को तैयार नहीं थे। इसी वजह से हड़ताल 18 दिनों तक जा पहुंची। हालांकि शुक्रवार को हाईकोर्ट के दखल के बाद हड़ताली कर्मचारियों ने वापस काम पर आने का आश्वासन दिया था। शनिवार सुबह 10 बजे के बाद पूरे प्रदेश में रोडवेज बस सेवा बहाल हुई।
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गौरतलब है कि रोडवेज के हड़ताली कर्मचारियों के समर्थन में कई अन्य विभागों के कर्मचारी उतर आए थे। हड़ताल को प्रदेश के विभिन्न विभागों के दो लाख से भी अधिक कर्मचारियों ने समर्थन दिया था। इस पर प्रदेश सरकार ने भी कड़ा रुख अपनाया था। सरकार ने सभी विभागाध्यक्षों से अक्टूबर महीने के दौरान 26 अक्टूबर, 30-31 अक्टूबर को हड़ताल पर रहे कर्मचारियों के खिलाफ की गई कार्रवाई की एक्शन टेकन रिपोर्ट मांगी थी। इस दौरान वेतन काटने की बात भी कही गई थी।

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दो लाख से ज्यादा कर्मचारी हड़ताल पर रहे

रोडवेज - फोटो : अमर उजाला
हरियाणा रोडवेज की हड़ताल के समर्थन में सभी विभागों के दो लाख से ज्यादा कर्मचारी हड़ताल पर थे। इस कारण दर्जनों विभागों में कामकाज भी ठप रहा। अनेक विभागों, बोर्डों, निगमों, नगर निगमों, पालिकाओं, परिषदों, विश्वविद्यालयों, सहकारी समितियों, केंद्र एवं राज्य सरकार की संचालित परियोजनाओं में हड़ताल का व्यापक असर दिखाई दिया। हड़ताल का सबसे ज्यादा असर बिजली वितरण निगमों में रहा।

निजीकरण सहन नहीं, उत्पीड़न से नहीं खत्म होगा आंदोल
बता दें कि रोडवेज कर्मचारी निजीकरण और किलोमीटर स्कीम का विरोध कर रहे थे। जबकि सरकार अपने फैसले से टस से मस होने को तैयार नहीं थी। हाईकोर्ट के दखल के बाद ही यूनियन नेताओं ने हड़ताल खत्म करने का आश्वासन दिया था। हाईकोर्ट ने हरियाणा सरकार द्वारा जारी बर्खास्तगी और निलंबन आदेश 14 सितंबर तक सस्पेंड करते हुए सभी निलंबित और बर्खास्त कर्मचारियों को भी सेवाओं में लौटने का आदेश दिया था।

यूनियन नेताओं के इस आश्वासन पर हाईकोर्ट ने हरियाणा में हड़ताल के चलते एस्मा के तहत जिन कर्मियों के खिलाफ कार्रवाई की है उस पर भी रोक लगा दी थी। साथ ही इस हड़ताल में जिस किसी भी अन्य विभाग के कर्मी शामिल हुए थे उन पर भी किसी भी तरह की कार्रवाई को अगली सुनवाई तक निलंबित कर दिया था। इसके साथ ही हाईकोर्ट ने कर्मचारी नेताओं को सरकार के साथ बैठक कर हल निकालने को था है।

सियासत भी हो गई थी शुरु
हरियाणा रोडवेज की हड़ताल पर सियासत भी गरमाना शुरु हो गई थी। हड़ताल को लंबा खिंचते देख और जनसमर्थन मिलने पर कांग्रेस और इनेलो ने हड़ताल को अपना पूरा समर्थन देना शुरु कर दिया था। जिलों में धरना स्थलों पर रोजाना कांग्रेस और इनेलो के नेता पहुंच रहे थे। कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष अशोक तंवर ने सभी हड़ताली कर्मचारियों की यूनियनों को पत्र लिखकर कांग्रेस का समर्थन दिया था। उन्होंने पत्र में हड़ताल को जायज ठहराते हुए किलोमीटर स्कीम के तहत 700 बसें लाने का कड़ा विरोध किया था।
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