हरियाणा में राज्यसभा चुनाव को लेकर कांग्रेस में मंथन हो रही है। विधायकों को बाहर भेजने पर सहमति नहीं बनी है। अब 13 मार्च को विधायक मिलेंगे। उसी दिन तय होगा कि विधायक बाहर जाएंगे कि नहीं।
हरियाणा में राज्यसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। राज्यसभा की दो सीटों को लेकर तीन उम्मीदवार मैदान में हैं। कांग्रेस अपने विधायकों को एकजुट रखने की रणनीति पर मंथन में जुटी है। क्रॉस वोटिंग के डर से कांग्रेस अपने विधायकों को दूसरे राज्यों में भेजने की तैयारी में थी मगर विधायक दल की बैठक में इस पर सहमति नहीं बन सकी।
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बताया जा रहा है कि बैठक में विधायकों को कर्नाटक, तेलगांना व हिमाचल भेजने का प्रस्ताव रखा गया था मगर इस पर एक राय नहीं बन सकी। अब इस पर फैसला 13 मार्च को होगा। उसी दिन विधायकों को बाहर भेजने के फैसले पर अंतिम मुहर लगेगी।
सोमवार को हरियाणा कांग्रेस विधायक दल की बैठक हुई जिसमें राज्यसभा चुनाव पर विस्तार से चर्चा की गई। बैठक में हरियाणा कांग्रेस के प्रभारी बीके हरिप्रसाद, प्रदेश अध्यक्ष राव नरेंद्र सिंह और नेता विपक्ष भूपेंद्र सिंह हुड्डा समेत सभी विधायक मौजूद रहे। बैठक में विधायकों को एकजुट बनाए रखने के लिए उन्हें दूसरे राज्य, विशेष रूप से हिमाचल प्रदेश ले जाने की संभावना पर भी चर्चा हुई। हालांकि इस प्रस्ताव पर सभी विधायकों के बीच सहमति नहीं बन सकी।
बैठक के बाद नेता प्रतिपक्ष भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने कहा कि कांग्रेस राज्यसभा चुनाव के लिए पूरी तरह एकजुट है। उन्होंने कहा कि पार्टी के पास 37 विधायक हैं और सभी कांग्रेस उम्मीदवार कर्मवीर बौद्ध के पक्ष में मतदान करेंगे।
क्रॉस वोटिंग के सवाल पर हुड्डा ने भाजपा पर तंज कसते हुए कहा कि क्रॉस वोटिंग की संभावना कांग्रेस में नहीं बल्कि भाजपा में हो सकती है। उन्होंने कहा कि भाजपा ने दो उम्मीदवार मैदान में उतारे हैं और उनमें से कौन जीतेगा यह 16 मार्च को पता चल जाएगा।
इनेलो भाजपा की बी टीम नहीं बनेगी
प्रदेश अध्यक्ष राव नरेंद्र ने कहा कि इनेलो भाजपा की बी टीम नहीं बनेगी और कांग्रेस उम्मीदवार का समर्थन करेगी। उनके मुताबिक यदि इनेलो का समर्थन मिलता है तो कांग्रेस उम्मीदवार को कुल 39 वोट मिल सकते हैं।
हरियाणा विधानसभा में क्या है समीकरण
हरियाणा विधानसभा में कुल 90 सदस्य हैं। इनमें भाजपा के पास 48 विधायक हैं जबकि कांग्रेस के पास 37 विधायक हैं। इसके अलावा इनेलो के दो विधायक और तीन निर्दलीय विधायक हैं। राज्यसभा चुनाव में जीत के लिए किसी भी उम्मीदवार को 31 वोटों की आवश्यकता होती है।
भाजपा के पास निर्दलीय विधायकों के समर्थन सहित कुल 51 वोट माने जा रहे हैं। ऐसे में भाजपा का एक उम्मीदवार तो आसानी से जीत की स्थिति में है। उसके बाद भी भाजपा के पास करीब 20 वोट बचते हैं।
दूसरी सीट के लिए मुख्य मुकाबला कांग्रेस समर्थित कर्मवीर बौद्ध और नांदल के बीच माना जा रहा है। यदि कांग्रेस के सभी विधायक एकजुट होकर वोट करते हैं और कोई क्रॉस वोटिंग नहीं होती है तो कर्मवीर बौद्ध की जीत लगभग तय मानी जा रही है। अगर नांदल इनेलो के दो वोट हासिल करने के साथ-साथ कांग्रेस में करीब नौ वोटों की सेंध लगा लेते हैं, तो समीकरण बदल जाएगा।