बैठक में एक बिंदु ये भी आया था कि हरियाणा में अधिकतर उत्तर प्रदेश, बिहार और मध्य प्रदेश में चल ही अवैध फैक्ट्रियों से हथियारों की तस्करी हो रही है। इसके बाद तय हुआ कि अगर कोई व्यक्ति अवैध हथियार के साथ पकड़ा जाता है तो केवल उसके खिलाफ कार्रवाई करके केस बंद नहीं करना है, बल्कि उससे तस्करों और फैक्टरी के बारे में जानकारी हासिल तक पूरे रैकेट को ही तोड़ना है। अगर इसके लिए पुलिस को पड़ोसी राज्यों में भी दस्तक देनी पड़े तो वह संबंधित राज्यों की पुलिस से समन्वय स्थापित कर कार्रवाई करेगी।
99 प्रतिशत वारदात में अवैध हथियारों का इस्तेमाल
पिछले काफी समय से हरियाणा में अपराध बढ़ रहे हैं। एनसीआरबी की रिपोर्ट भी इसकी पुष्टि कर रही है। यूपी में बदमाशों के खिलाफ चलाए जा रहे सख्त अभियान के चलते बदमाश हरियाणा में शरण ले रहे हैं। हरियाणा पुलिस के एक सीनियर आईपीएस अधिकारी मानते हैं कि मात्र एक प्रतिशत वारदात लाइसेंसी हथियारों से होती हैं। शेष 99 प्रतिशत वारदात में अवैध हथियारों का इस्तेमाल किया जाता है। 18 जुलाई और 6 सितंबर को पुलिस द्वारा चलाए गए ऑपरेशन आक्रमण में ही 200 से अधिक अवैध हथियार बरामद किए गए थे। हथियारों की सप्लाई तोड़ने के लिए प्रदेश की सीमावर्ती इलाकों में जांच बढ़ाई जाएगी।
यहां से आते हैं हथियार
प्रदेश में यूपी के बुलंदशहर, जेवर, अलीगढ़, मथुरा, मेरठ, शामली, कैराना और बिहार के मुंगेर और मध्य प्रदेश व अन्य स्थानों से अवैध हथियार आते हैं। वहीं, प्रदेश में अवैध हथियारों की सबसे अधिक खपत पलवल, मेवात, रोहतक, सोनीपत और भिवानी में होती है। इन्हीं जिलों में गैंगस्टर अधिक सक्रिय हैं और वो अपने गुर्गों के जरिये वारदात को अंजाम दिलाते हैं। शौक और अपराध के लिए ये आसानी से उपलब्ध है और 5 से 10 हजार रुपये में मिल जाते हैं। इसलिए अवैध हथियारों की खपत ज्यादा है।
हरियाणा में बदमाशों के लिए कोई जगह नहीं है। अवैध हथियारों के पूरे रैकेट को ध्वस्त किया जाएगा। इसके लिए पुलिस विशेष रणनीति के तहत काम कर रही है और तस्करों को काबू कर हथियार बरामद किए जा रहे हैं। - अनिल विज, गृह मंत्री।