शिवालिक विकास मंच के अध्यक्ष विजय बंसल ने हरियाणा पुलिस के डीजीपी से आरटीआई में विभिन्न बिंदुओं पर जानकारी मांगी थी। जिसमें बीट बॉक्स, पीसीआर शेल्टर, नाकों व अन्य जगह लगने वाले पुलिस बैरिकेड्स, साइन बोर्ड्स व नोटिस बोर्ड पर लगने वाले विभिन्न कंपनियों आदि के विज्ञापनों को लगाने की क्या प्रक्रिया है। प्रति वर्ष कुल कितनी आय होती है, कब-कब टेंडर निकाला गया, किस-किस कंपनी को किस आधार पर स्थान आवंटित हुआ, विज्ञापनों से होने वाली आय, एकत्रित राशि को कहां व किन योजनाओं में खर्च किया जाता है। इस पर पुलिस विभाग ने विज्ञापनों से होने वाली आय, टेंडर व किस प्रक्रिया के तहत निजी कंपनियों के विज्ञापन लगाए जाते है का जवाब नहीं दिया। जवाब में सिर्फ ये बताया कि सरकारी खर्च से ही यह सामान खरीदा जाता है और किसी भी फर्म से बीट बॉक्स व बैरिकेड्स नहीं रखवाए जाते।
जांच कराकर दोषियों पर करें कार्रवाई : बंसल
गृह मंत्री अनिल विज से विजय बंसल ने मांग की है कि निष्पक्ष जांच करवाकर सभी दोषी अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की जाए। विभिन्न कंपनियों के विज्ञापन तुरंत प्रभाव से हटाएं। सरकार को हुए राजस्व के नुकसान की भरपाई विभिन्न कंपनियों को जुर्माना लगाकर करें। इसके साथ ही सुनिश्चित किया जाए कि भविष्य में किसी भी निजी कंपनी का विज्ञापन बिना मंजूरी के प्रदर्शित न हो। उधर, गृह मंत्री अनिल विज के पास अभी विज्ञापन घोटाले का ज्ञापन नहीं पहुंचा है। उन्होंने कहा कि ज्ञापन पहुंचने पर सच्चाई जानेंगे। भ्रष्टाचार की आशंका होने पर जांच कराई जाएगी।