सुप्रीम कोर्ट का फैसला आते ही हरियाणा में अब पंचायत चुनाव के लिए पढ़े-लिखे उम्मीदवारों की भागदौड़ शुरू हो गई है। पंच-सरपंच पद का चुनाव लड़ने के इच्छुक लोगों ने नए सिरे से तैयारियां शुरू कर दी हैं।
उनकी यह तैयारी पंचायती राज अधिनियम में संशोधन पर अदालत का फैसला आने के बाद तय नियत-शर्तों के मुताबिक हो रही है।
इस बीच कुछ लोग बैंक डिफॉल्टर होने से बचने के लिए एनओसी बनवाने की तैयारियों में जुट गए हैं। सूबे में कुछ ऐसे भी भावी उम्मीदवार हैं, जो मैट्रिक पास का सर्टिफिकेट हासिल करने में जुटे हैं।
हालांकि कुछ लोग शैक्षिक योग्यता के अभाव में इस दौड़ से पहले ही बाहर हो गए हैं। ऐसे में चुनावी दौड़ से बाहर होने वालों के स्थान पर नए प्रत्याशी के लिए भी जोड़तोड़ शुरू हो गई है।
प्रदेश में पंचायत चुनाव के तहत 62683 पंच, 3001 पंचायत समिति सदस्य और 416 जिला परिषद के सदस्यों का चुनाव होगा। इसके लिए प्रदेश में कुल एक करोड़, 10 लाख, 9317 मतदाता मताधिकार का प्रयोग करेंगे।
चुनाव के लिए जहां राज्य निर्वाचन आयोग की ओर से तैयारियां पूरी होने के दावे किए जा रहे हैं तो दूसरी तरफ सभी की निगाहें पंचायत चुनाव के लिए शेड्यूल घोषित होने की ओर टिकी हैं।
मोरनी ब्लॉक के दाबसू पंचायत के उम्मीदवार जोगिंदर सिंह ने आठवीं तक की पढ़ाई की है, नतीजतन चुनाव नहीं लड़ सकेंगे।
गांव मतौली से सरपंच पद के लिए चुनाव लड़ने के इच्छुक तेजाराम भी शैक्षणिक योग्यता न होने के कारण चुनाव से बाहर हो गए हैं। जबकि दतरों पंचायत की उतरों से एसी महिला रिजर्व सीट में दो में से एक महिला शैक्षणिक योग्यता के अभाव में चुनाव मैदान से पहले ही बाहर हो गई।
नामांकन से पहले सभी को पांच से छह दिन का वक्त दिया जाएगा, ताकि शेष औपचारिकताओं के साथ नए नामांकन के लिए भी वक्त मिल सके। पहले चरण में नामांकन करने वालों को भी वक्त मिलेगा।
- परमार सिंह, राज्य चुनाव आयोग के सहायक आयुक्त (हरियाणा)