कांग्रेसी विधायकों ने तर्क रखे की कि विधेयक में कुछ ऐसी चीजें हैं, जिससे आम व्यक्ति के अधिकार इससे प्रभावित हो सकते हैं। इसी बीच असंध से विधायक शमशेर गोगी ने कहा कि विधेयक का विरोध करते हुए कहा कि इससे पुलिस प्रदेश बन जाएगा, इससे पुलिस के पास और पावर आ जाएगी। जरूरत पुलिस की जिम्मेदारी तय करने की है।
जवाब में मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने कहा कि पूरी तरह से विचार और मंथन के बाद इस प्रस्ताव को लाया गया है और पहले भी यह दो बार पारित हो चुका है। लेकिन कांग्रेसी विधायकों ने हंगामा जारी रखा। इधर, प्रस्ताव के समर्थन में भाजपा विधायकों ने भी मोर्चा संभाला और मुख्यमंत्री का समर्थन किया। तनावपूर्ण हुई स्थिति के बीच दोबारा सदन को स्थगित करना पड़ा। आधे घंटे के बाद दोबारा से सदन में प्रस्ताव रखा, जिसे सदन ने पास कर दिया। कांग्रेसी विधायकों ने कहा कि वह अपराध और गैंगस्टर के खिलाफ हैं, लेकिन इसे पहले चयन कमेटी को भेजना चाहिए था।
10 लाख जुर्माने से उम्रकैद तक का प्रावधान
एक्ट के तहत किसी भी अपराधी के खिलाफ तभी मामला दर्ज होगा, जब वह अंतिम दस वर्षों के भीतर कम से कम दो संगठित अपराधों में संलिप्त पाया जाए और इस अपराध में एक से अधिक व्यक्ति शामिल हों। प्रस्तावित हकोका में 2 साल से उम्रकैद तक की सजा और 2 लाख रुपये से दस लाख रुपये जुर्माने का प्रावधान होगा।
गठित होंगी विशेष अदालतें
अधिनियम के तहत अपराधों के मुकदमे से निपटने के लिए विशेष अदालतें गठित की जाएगी। साथ ही विशेष अभियोजकों की व्यवस्था करने के लिए के लिए प्रावधान होंगे।
संगठित अपराध में शामिल किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा : मनोहर लाल
मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने कहा कि संगठित अपराधों में शामिल बदमाशों को बख्शा नहीं जाएगा। इस कानून के साथ, राज्य सरकार न केवल गैंगस्टरों, उनके मुखियाओं और संगठित आपराधिक गिरोह के सदस्यों के खिलाफ कार्रवाई होगी, बल्कि पुलिस को सशक्त बनाया जाएगा। महाराष्ट्र सरकार ने अपने यहां 1999 में मकोका बना दिया था, जबकि दिल्ली सरकार 2002 में इस तरह का कानून बना चुकी है। समय की जरूरत के अनुसार उसी तर्ज पर यह कानून बनाया जा रहा है।