पंचायत चुनाव में पढ़े-लिखे उम्मीदवारों की शर्त को लागू करने के बाद भाजपा अब हरियाणा नगर निकाय चुनाव में भी यही फार्मूला अपनाएगी। मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर ने इसकी हामी भर दी है। पत्रकारों से बातचीत में सीएम ने खुलासा किया कि जल्द ही इस विषय में अध्यादेश लाया जाएगा।
उन्होंने कहा कि हरियाणा की सभी 79 शहरी स्थानीय निकायों में से 42 निकायों के आम चुनाव भी होने हैं। सरकार की मंशा है कि पढ़े लिखे लोग चुन कर आगे आएं। इस शर्त को किस तरह से लागू किया जाना है, इस पर अभी फैसला नहीं हुआ है, लेकिन शीघ्र ही इस पर भी फैसला हो जाएगा।
उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट का पंचायत चुनाव को लेकर दिया गया फैसला पंचायती राज प्रणाली में सुधारों की दिशा में मील का पत्थर साबित होगा। इस निर्णय के बाद पंचायती राज संस्थानों में साफ और स्वच्छ छवि के प्रतिनिधि चुने जा सकेंगे। हरियाणा सरकार पंच, सरपंच, पंचायत समिति व जिला परिषद के लिए दिए जा रहे मासिक मानदेय में जल्द ही बढ़ोतरी करेगी।
उन्होंने कहा कि इस फैसले से हरियाणा में एक नई राजनीति की शुरुआत होगी और ग्रामीण क्षेत्र में एक अच्छा नेतृत्व उभरकर आएगा। सर्वोच्च न्यायालय ने अपने निर्णय में हरियाणा सरकार के प्रयासों की सराहना की है और इस फैसले के पूरे देश में लागू किए जाने की आवश्यकता बताई है।
उन्होंने कहा कि हरियाणा ने व्यवस्था बदलने की पहल की है, जिसे सर्वोच्च न्यायालय ने भी सही माना है और अपने निर्णय में टिप्पणी की है कि इसे पूरे देश में लागू किया जाए।
अच्छे उम्मीदवार आगे आएं
मुख्यमंत्री ने कहा कि अच्छे उम्मीदवार आगे आएं। इसके लिए शैक्षणिक योग्यता पंच, सरपंच, पंचायत समिति व जिला परिषद के लिए कम से कम 10वीं पास निर्धारित की गई थी, जबकि महिलाओं व अनुसूचित जाति के लिए आठवीं पास निर्धारित की गई थी। अनुसूचित जाति की महिलाओं के पंच के चुनाव लड़ने के लिए न्यूनतम शैक्षणिक योग्यता पांचवीं पास निर्धारित की गई थी। सहकारी बैंकों व बिजली बिलों के डिफाल्टरों और न्यायालय द्वारा दोषी ठहराए गए उम्मीदवारों के चुनाव लड़ने पर रोक के अलावा नामांकन के समय उम्मीदवारों के घर में शौचालय होने की घोषणा करने की शर्त संशोधन में जोड़ी गई थी, जिसे सर्वोच्च न्यायालय ने सही माना है।